दंतेवाड़ा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को यहां नक्सल पीड़ित परिवारों को पुनर्वास योजना के अंतर्गत नवनिर्मित आवासों की चाबी सौपी। इस दौरान उन्हें कुछ पीड़ित परिवार के सदस्यों ने आपबीती सुनाई। रामनाथ मंडावी ने अपनी दुखभरी हकीकत सुनाई तो भूपेश बघेल भी भावुक हो गए। रामनाथ मंडावी ने मुख्यमंत्री से कहा घर क्या होता है? ये मुझे पता ही नहीं है। मैंने 21 साल की उम्र तक सिर्फ डर देखा है। डर की वजह से छह साल की उम्र से मेरी मां ने घर आने ही नहीं दिया।

साल 2005 मे छह साल का था जब नक्सलियों ने पूरा घर तबाह कर दिया। लूट का ऐसा तांडव मचाया कि घर से गाय, बकरी, कपड़े, बर्तन यहां तक कि नमक तक लूटकर ले गए। घर में सिर्फ दरवाजा और चार दीवारें ही बची रहीं। अगले दिन हमारे पास पहनने को कपड़े तक नहीं थे। कुछ महीने बाद ही 26 फरवरी 2006 को महाशिवरात्रि थी। बड़े भाई मोहन मंडावी जो एसपीओ थे तुलार गुफा से शिवलिंग के दर्शन कर लौट रहे थे।

उन्हें नक्सलियों ने भरे बाजार में गोली मारकर हत्या कर दी। रामनाथ ने बताया कि डर की वजह से उसे पढ़ाई के लिये 2007 में बालक आश्रम बारसूर फिर भैरमगढ़ पोटाकेबिन इसके बाद मारडूम भेज दिया। अपनी दास्तां बताते हुए रामनाथ मंडावी की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा कि वह जिंदा रहे इसके लिए मां उसे घर नहीं आने देती थी। जब भी दिल करता मां-बेटा बाजार में मिलने पर लिपटकर खूब रोते थे। रामनाथ ने बताया कि बड़े भाई की हत्या के 15 साल बाद वह बाजार में मां से मिला था। रामनाथ ने कहा कि अब सरकारी आवास में मां के साथ रह सकूंगा।

हत्या के बाद नक्सल पीड़ित एवं नक्सल घटनाओं में बलिदानी परिवारों के लिये दंतेवाड़ा के कारली में सर्व सुविधायुक्त 36 आवास निर्मित किये गये हैं। जिनमें से 30 आवास नक्सल पीड़ित परिवारों को आवंटित कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शासकीय आवास की चाबी पाने के बाद सीमा कर्मा बेहद खुश हैं। सीमा बताती हैं कि वह और मां नक्सलियों द्वारा पिता की हत्या के बाद बेहद सदमें में रहे। पिता गोपनीय सैनिक थे। घटना वाली रात नक्सली दरवाजा तोड़कर घर में घुस आये और पिता को घसीटते हुये ले गए। हम लोग बहुत गिड़गिड़ाए लेकिन नक्सलियों ने पिता को नहीं छोड़ा।

मां ने मजदूरी कर हम तीनों भाई-बहन को पाला

अगले दिन पता चला कि नक्सलियों ने पिता की गला रेतकर हत्या कर दी है। इसके बाद नक्सली हमारे गांव वाले घर में पथराव करते रहे ताकि हम लोग दहशत से घर छोड़कर चले जाएं। मां ने मजदूरी कर हम तीनों भाई-बहन को पाला है। सीमा ने बताया कि अभी अनुकंपा नियुक्ति के तौर पर आरक्षक के पद पर ज्वाइन कर लिया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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