प्रदीप गौतम, दंतेवाड़ा। Dead Bodies On Shoulders: नक्सलियों के सड़क काट देने की वजह से बारिश में ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सड़क काटने की वजह से मीलों पैदल शव ले जाने के लिए काकड़ी के परिजन मजबूर हुए। दरअसल, कुआकोंडा ब्लाक के ककाड़ी गांव तक पिछले वर्ष तक एंबुलेंस सहित दूसरे वाहन पहुंच जाते थे। पिछले वर्ष नक्सलियों के द्वारा इस सड़क को काट दिया था, जिसके बाद अब परेशानी बढ़ गई है। मंगलवार को ककाड़ी गांव के कोसा की मौत जिला अस्पताल में हो गई थी।

मृतक के शव को मुक्तांजली से ककाड़ी भेजा गया था। नक्सलियों ने सड़क काट दी, इसलिए ग्रामीणों को मुख्य सड़क से गांव तक सात किलोमीटर कोसा के शव को कांधे पर ढोना पड़ा। नहाड़ी में कैंप खुलने की चर्चा एक साल से है, जिसके बाद यहां नक्सलियों के दबाव में सैकड़ों ग्रामीणों ने पिछले वर्ष डेरा लगा कर सड़क को 50 से अधिक जगह काट डाला है। नक्सलियों की इन करतूतों की वजह से दंतेवाड़ा जिले को मिले शव वाहन भी ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर नहीं चल पाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कोसा के शव को मुक्तांजलि वाहन से गांव भेजा पर मुख्य मार्ग से अंदर जाने का रास्ता नहीं था। मजबूरन स्वजनों ने कावड़ बनाकर शव को सात किमी कंधे पर ढोना पड़ा। यह सड़क दोबारा बने इसके लिए ग्रामीणों को फोर्स का इंतजार करना होगा। नक्सली दहशत की वजह से ग्रामीण खुलकर सड़क की मांग भी नही करते हैं। सड़क, पुलिया की मांग का मतलब सीधे मौत को आमंत्रण है। इस क्षेत्र में ग्रामीण नक्सलियों के कहने के मुताबिक सड़क नहीं काटेंगे, तो भी सजा उनको मिलेगी।

ककाड़ी नहाड़ी क्षेत्र 2007 से कटा हुआ है, यहां अभी तक कच्ची सड़क थी एंबुलेंस गांव तक जैसे तैसे पहुंच जाती थी। साल भर से इस सड़क पर साइकिल भी नहीं जा पा रही है। इसके चलते ग्रामीण जंगल के रास्तों से आवाजाही करते हैं। इस दौरान भी रास्ते में आईईडी का खतरा बना रहता है।

बयान

नहाड़ी, काकड़ी क्षेत्र में जल्द सड़क बनेगी। विनोद का इसी क्षेत्र में बेस था। विनोद के मरने से नक्सलियों को काफी नुकसान हुआ है। विनोद की पकड़ नहाड़ी ककाड़ी में ज्यादा थी। अब ग्रामीणों को उसकी दहशत से मुक्ति मिली है तो जल्द ही विकास होगा।

- डॉ. अभिषेक पल्लव, एसपी दंतेवाड़ा

Posted By: Shashank.bajpai

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