प्रदीप गौतम। दंतेवाड़ा। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में अफसर सरकारी पैसे की बरबादी कैसे करते हैं लखापाल के कन्या आश्रमशाला का भवन उसका एक नमूना मात्र है। यहां शिक्षा विभाग के घोटाले अक्सर सुर्खियों में रहते आए हैं पर यह घोटाला भर नहीं है बल्कि सीधे-सीधे सरकारी पैसे के अपव्यय का मामला है। अफसरों ने कटेकल्याण ब्लाक के लखापाल गांव की कन्या आश्रमशाला नजदीक के दूसरे गांव गाटम में बनवा दी जिसका कोई उपयोग न हो सका। अब उससे ज्यादा राशि खर्च कर लखापाल में दोबारा आश्रमशाला बनवाई जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि लखापाल में कन्या आश्रमशाला बनाने में मनमानी की गई जिससे इसका भवन दो बार बनाना पड़ा। दरअसल कुछ साल पहले लखापाल में कन्या आश्रमशाला की स्वीकृति मिली थी। तब गांव के स्कूल को ही आश्रमशाला में तब्दील कर दिया गया था। स्कूल में उतनी सुविधा नहीं थी कि बच्चियों को वहां रखकर पढ़ाया जा सकता लिहाजा राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत आश्रमशाला का भवन बनाने के लिए 70 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति ली गई।

इसके बाद अफसरों ने वहां से चार किमी दूर गाटम पंचायत में लखापाल के कन्या आश्रमशाला का निर्माण करा दिया। गांव की आश्रमशाला को दूसरे गांव शिफ्ट करने से पहले ग्रामीणों से न सलाह ली गई न सहमति। जाहिर है कि इससे बात बिगड़ गई। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और अपनी बच्चियों को घर से दूर दूसरे गांव की आश्रमशाला में भेजने से मना कर दिया। ग्रामीणों ने इसे लेकर कटेकल्याण ब्लाक मुख्यालय में एक रैली भी निकाली। उनके विरोध को देखते हुए अफसरों को नए भवन में आश्रमशाला की शिफ्टिंग रोकनी पड़ी।

गांव के स्कूल में अस्थाई व्यवस्था के तहत आश्रमशाला का संचालन होता रहा पर नई बिल्डिंग का कोई उपयोग न हो पाया। तीन साल तक यथास्थिति बनी रही। इस बीच नए भवन के खिड़की, दरवाजे, पानी की टंकी, बिजली बोर्ड आदि सामान चोर उखाड़ ले गए। बिना उपयोग के भवन खंडहर होने लगा। निर्माण की योजना बनाने में माहिर अफसरों ने इसके बाद गाटम के भवन को छोड़कर लखापाल में जहां ग्रामीण चाहते थे वहां भवन निर्माण की योजना तैयार की।

इसके लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन से दोबारा करीब 80 लाख रूपये की स्वीकृति ली गई और काम शुरू कराया गया। यह भवन भी अब लगभग तैयार है। कोविड काल खत्म होगा तो लखापाल में कन्या आश्रमशाला का संचालन शुरू हो जाएगा। हालांकि गाटम के भवन का क्या होगा इस सवाल पर अफसर बगलें झांकने लगते हैं।

जगह-जगह दिखती है सरकारी पैसे की बर्बादी

दंतेवाड़ा जिले में जगह-जगह सरकारी पैसे की ऐसी ही बरबादी दिखती है। कई जगहों पर पुलिया का निर्माण कराया गया है पर सड़क है ही नहीं। कुआकोंडा ब्लाक के गदापाल गांव में एक ऐसी पुलिया है जिसे सड़क से कभी जोड़ा न जा सका। ग्रामीण पक्की पुलिया का उपयोग महुआ सुखाने में करते हैं। बचेली-किरंदुल इलाके में एनएमडीसी मद से ऐसे निर्माण आमतौर पर दिखते हैं जो उपयोगविहीन हैं।

गाटम में भवन बनाया गया था पर लखापाल के ग्रामीणों के विरोध की वजह से नए भवन में कन्या आश्रमशाला को शिफ्ट नहीं किया जा सका। ग्रामीणों की मांग पर लखापाल में नया भवन बना रहे हैं। गाटम में बने भवन का भी कुछ न कुछ उपयोग कर लेंगे।

- राजेश कर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी दंतेवाड़ा

Posted By: Nai Dunia News Network

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