दंतेवाड़ा। संयुक्‍त पंचायत संघर्ष समिति के आंदोलन से एनएमडीसी किरंदुल परियोजना में उत्‍खनन पांच दिन से पूरी तरह ठप है। इससे प्रबंधन को प्रतिदिन करोंड़ों रूपए का नुकसान हो रहा है। पांच दिनों में एनएमडीसी को एक हजार करोड़ रूपए का नुकसान हो चुका है। आदिवासी डिपोजिट-13 में उत्‍खनन और अडानी ग्रुप का विरोध कर रहे हैं।

पहाड़ को बचाने आदिवासी समुदाय 7 जून से किरंदुल चेकपोस्‍ट पर धरना- प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे एनमएडीसी के कर्मचारी खदानों तक नहीं जा पा रहे हैं। पांच दिनों से किरंदुल परियोजना के डिपोजिट 14, डिपोजिट 11 में उत्‍खनन व दीगर कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा है। खदान में न उत्‍खनन हो रहा है और न ही लोडिग आदि के काम हो पा रहे हैं। ऐसे में एनएमडीसी प्रबंधन को रोजाना लाखों रूपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एक जानकारी के अनुसार किरंदुल के माइनिंग एरिया 11 सी, 11बी और डिपोजिट 14 में प्रतिदिन करीब 50 हजार टन लौह अयस्‍क का उत्‍खनन होता है। इस अयस्‍क की कीमत करीब 150 करोड़ रूपए से अधिक होती है। इस तरह एनएमडीसी प्रबंधन को पांच दिनों 750 करोड़ रूपए का नुकसान हो चुका है। यदि आंदोलन आगे भी जारी रहा तो नुकसान का आंकड़ा लगातार बढ़ता जाएगा।

सरकार को राजस्‍व नुकसान

एनएमडीसी में उत्‍पादन बाधित होने से प्रबंधन प्रतिदिन करीब 200 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही सरकार को भी राजस्‍व नुकसान उठाना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक सरकार को राययल्‍टी के रूप में प्रतिटन पर करीब 500 रूपए जमा होती है। उत्‍पादन ठप होने से सरकार को बराबर नुकसान झेलना पड़ रहा है।


ठेकेदार भी परेशान

आदिवासियों के आंदोलन का साइड इफेक्‍ट एनएमडीसी से जुड़े अन्‍य कार्यों में संलग्‍न मजदूर- ठेकेदारों को भी उठाना पड़ रहा है। लौह अयस्‍क के परिवहन तथ लोडिंग- अनलोडिंग और दीगर में कार्य सैकडो मजूदर ठेकेदारों के लिए काम करते हैं। उत्‍पादन प्रभावित होने से ऐसे मजदूर और ठेकेदार भी परेशान हैं।

उन्‍हें काम मिलना बंद हो गया है। इससे उनके सामने रोजी- रोटी समस्‍या भी नजर आ रही है। आल इंडिया वकर्स फेडरेशन यूनिय के सेक्रेटरी राजेश संधु ने कहा कि इस हड़ताल से मजदूरों का भी नुकसान हो रहा है। नियमित 1300 से अधिक कर्मचारियों के अलावा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। उनका वेतन कटौति भी हो रही है।

इनका कहना है

पांच दिनों से साइड में उत्‍खनन कार्य पूरी तरह बंद है। कर्मचारी काम पर नहीं जा पा रहे हैं। इसके चलते उत्‍पादन प्रभावित हो रहा है। प्रबंधन को रोजाना करोड़ों रूपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

-एके प्रजापति, अधिशासी निदेशक, किरंदुल परियोजना

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