योगेंद्र ठाकुर, दंतेवाड़ा (नईदुनिया)

नक्सलगढ़ दंतेवाड़ा के गुमरगुंडा आश्रम के सौ से अधिक बच्चे इन दिनों श्रीमद्भगवत गीता का पाठ कर रहे हैं। ऋषिकेश से आए स्वामी आनंद स्वरूपानंद और स्थानीय स्वामी विशुद्धानंद सरस्वती उन्हें इसका अभ्यास करा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चे नक्सल पीड़ित परिवारों के हैं। वहीं कुछ बच्चों के माता-पिता नक्सलियों के हाथों मारे जा चुके हैं। गीता पाठ कराने का उद्देश्य बच्चों को धर्म और कर्म का ज्ञान कराना है, जिससे कि जीवन में वे न तो भ्रमित हों, न ही भटकें।

आश्रम के स्वामी विशुद्धानंद सरस्वती कहते हैं कि हम बहुत सी किताबें और अपने रोल माडल के बारे में बच्चों को बताते हैं, पर जीवन की सच्चाई और धर्म-कर्म भूल जाते हैं। श्रीमद्भगवत गीता कर्म और धर्म दोनों के बारे में बताती है। इसमें ज्ञान और विज्ञान दोनों हैं। आधुनिकता की दौड़ में अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूलने के बीच आदिवासी क्षेत्र से आने वाली सुखद खबर यह है कि नक्सलगढ़ के बच्चे सनातन संस्कृति का पाठ पढ़ रहे हैं। बच्चे दैनिक दिनचर्या की शुरुआत से लेकर रात्रि विश्राम तक की बातें जानने के साथ नियमित रूप से गीता का पाठ करने का अभ्यास कर रहे हैं। बच्चों को यहां कक्षा आठवीं तक निश्शुल्क शिक्षा दी जाती है। इसके बाद कुछ बच्चे यहीं रहकर आगे की पढ़ाई करते हैं। भागवत कथा वाचन में पारंगत बच्चे गृहस्थों के घर में या अन्यत्र होने वाले धार्मिक आयोजन में पाठ भी करते हैं।

जनवरी में लगाते हैं अभ्यास शिविर

आश्रम में दंतेवाड़ा, बीजापुर व अन्य कुछ जिलों के बच्चे रहते हैं। सुबह योगाभ्यास, प्राणायाम के बाद स्नान और फिर गीता पाठ का अभ्यास कराया जाता है। इस वर्ष गीता पाठ में सौ से अधिक बच्चे शामिल हो रहे हैं। एक पखवाड़े का यह शिविर प्रतिवर्ष जनवरी में लगाया जाता है। बच्चे शिविर के बाद अपने गांव जाकर भी गीता पाठ करते हैं। कुछ बच्चे तो गांव के मंदिरों में गीता पाठकर लोगों को धर्म से जोड़ रहे हैं।

वर्जन

पाश्चात्य संस्कृति को हावी होने से रोकने, भारतीय संस्कृति व धर्म से नई पीढ़ी को अवगत कराने व मानवता को सहेजने के लिए आश्रम में नई पीढ़ी के बच्चों को गीता पाठ का अभ्यास कराया जाता है। आश्रम में नक्सल हिंसा के शिकार परिवारों के बच्चे ज्यादा हैं। इन्हें गीता पाठ के साथ अन्य वेद मंत्रोच्चार का भी ज्ञान और अभ्यास कराया जाता है।

-स्वामी विशुद्धानंद सरस्वती, स्वामी शिवानंद आश्रम दिव्य जीवन संघ, गुमरगुंडा

Posted By: Nai Dunia News Network

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