प्रदीप गौतम, दंतेवाड़ा। सुकमा से सटे जिले के अंतिम सीमा पर बसे मुलेर गांव के लोगों ने सरकारी राशन लेने से इन्कार कर दिया है। गांव के 112 परिवारों ने बैठक कर यह निर्णय लिया है कि पीडीएस का राशन नहीं लेंगे। हालांकि इस फैसले की वजह से ग्रामीण नहीं बता रहे हैं। ग्रामीणों के इस रवैये से खाद्य विभाग के अफसर भी हैरान हैं।

कुआकोंडा ब्लाक के नहाड़ी पंचायत का आश्रित गांव मुलेर सुकमा जिले की सरहद बड़ेचेट्टी के पास बसा हुआ है। दंतेवाड़ा से यहां तक कोई सीधा पहुंच मार्ग नहीं है। सुकमा जिले के बड़ेचेट्टी होकर यहां सिर्फ गर्मियों के मौसम में बाइक पर पहुंचा जा सकता है। साल के अन्य दिनों में यह गांव पहुंचविहीन बना रहता है। यहां के सभी परिवार बीपीएल हैं। इन लोगों को दंतेवाड़ा के अरनपुर से राशन मिलता है। इसके लिए उन्हें 30 किमी पैदल चलना पड़ता है।

ग्रामीण राशन की दुकान बड़ेचेट्टी में शिफ्ट करने की मांग करते रहे हैं। यह प्रक्रिया चल रही है। मुलेर के लिए मई और जून का मुफ्त सरकारी राशन भेजा गया था पर गांव से राशन लेने के लिए कोई आया ही नहीं। अब पता चला है कि उन्होंने राशन न लेने का फैसला किया है। कोरोना काल में गरीब परिवारों का सरकारी राशन से इंकार करने पर खाद्य विभाग चिंतित है।

कोरोना टीका भी नहीं लगवा रहे

मुलेर गांव की 365 की आबादी है पर अभी तक गांव के किसी भी सदस्य ने कोरोना का टीका नही लगवाया है। कोरोना का टीका लगाने ग्रामीणों को लगातार जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। यह इलाका अति नक्सल प्रभावित है। राशन व टीके से मना करने की सही वजह सामने नहीं आई है।

पंचायत के माध्यम से जानकारी मिली है कि मुलेर के लोग राशन नहीं उठा रहे हैं। पता कर रहे हैं कि इसकी वजह क्या है। ग्रामीणों ने दुकान बड़ेशेट्टी शिफ्ट करने की मांग की थी जिसपर कार्रवाई चल रही है।

- अमित तिवारी, फूड इंस्पेक्टर कुआकोंडा ब्लाक

Posted By: Nai Dunia News Network

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