धमतरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पिछले साल की तुलना में इस साल बारिश पिछड़ गई है। पूरे सीजन में 48 मिमी औसत वर्षा कम हुई है। आषाढ़ माह में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ खेती-किसानी प्रभावित है। बोआई व रोपाई आधी हो पाई है, ऐसे में किसानों को सावन माह के प्रवेश करते ही झमाझम बारिश होने का इंतजार है।

24 जुलाई को आषाढ़ माह का अंतिम दिन रहा। आसमान में धूप खिली रही। शाम को बादल वाला मौसम बना, लेकिन बारिश नहीं हुई। एक जून से अब तक धमतरी जिले में 402 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले साल की तुलना में कम है। पिछले साल 24 जुलाई तक जिले में 450 मिमी औसत वर्षा हो चुकी थी। इस साल 48 मिमी औसत वर्षा पिछले साल से कम हुई है।आषाढ़ माह के अधिकांश दिन 32 से 33 डिग्री तेज धूप और भारी उमस वाला मौसम बना रहा। गिनती के दिन ही बारिश हुई, वह भी कुछ समय तक के लिए। पूरे आषाढ़ माह में झमाझम बारिश की झड़ी देखने को नहीं मिली। तेज धूप व उमस के बीच आषाढ़ माह की शुरूआत हुई और इसी के साथ खत्म भी हो गई। 25 जुलाई से सावन माह की शुरूआत हो रही है। किसानों को पहले सप्ताह से ही झमाझम बारिश होने का इंतजार है, ताकि खरीफ खेती-किसानी में तेजी आ सके।

62 फीसद में बोआई व 45 फीसद में रोपाई

23 जुलाई को कृषि विभाग से जारी खरीफ साप्ताहिक प्रतिवेदन के अनुसार जिले में 79 हजार हेक्टेयर पर बोता का लक्ष्य है। अब तक 49 हजार हेक्टेयर पर बोता हुआ है, जो लक्ष्य का 62 फीसद है। इसी तरह रोपा 55 हजार हेक्टेयर से अधिक पर लगाने का लक्ष्य है। जिले में अब तक 25 हजार हेक्टेयर पर रोपाई हुआ है, जो लक्ष्य के 45 फीसद है। 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर लेही का लक्ष्य है। जो सिर्फ पांच हजार हेक्टेयर पर हुआ है, यह लक्ष्य का 20 फीसद है। बियासी की अभी शुरूआत नहीं हुई है। कतार बोनी, श्री पद्धति लक्ष्य से काफी कम हुआ है। इस तरह जिले में अब तक खरीफ खेती-किसानी 55 फीसद हुई है। 45 फीसद खेती-किसानी होना शेष है। कृषि उप संचालक जीएस कौशल का कहना है कि पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से इस साल खरीफ खेती किसानी पिछड़ गई है। सावन माह में अच्छी बारिश होने के बाद खेती-किसानी में तेजी आने की संभावना है।

बोर सिंचाई सुविधा वाले छिड़क रहे खाद

बोर सिंचाई सुविधा वाले जिले के अधिकांश किसान अपने खेतों में रोपाई कर लिया है। जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर बोर सिंचाई सुविधा से खेती होती है। इन किसानों के खेतों में धान फसल तैयार होने लगी है। कई किसान अब अपने खेतों में खाद का छिड़काव कर रहे हैं। इधर मानसून पर आधारित खेती-किसानी करने वाले किसानों के खेत सूखा है, जिन्हें बारिश का इंतजार है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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