धमतरी । वर्षा थमने के बाद खरीफ खेती-किसानी कार्य में तेजी आई है। किसान पौधों के विकास के लिए खाद का छिड़काव कर रहे हैं। वहीं बोता व लेही पद्धति से धान फसल लगाने वाले किसान इन दिनों अपने खेतों में खरपतवार निकालने निंदाई करा रहे हैं। अंचल में एक साथ निंदाई शुरू होने से मजदूरों की किल्लत शुरू हो गई है। किसानों को निंदाई के लिए बाहर से मजदूर बुलाना पड़ रहा है।

आषाढ़, सावन व भादो माह में इस साल दो बार बाढ़ की स्थिति बनी। किसानों के धान फसल लगातार पानी में डूबी, इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। निचले क्षेत्र में खरीफ खेती-किसानी करने वाले किसानों के धान फसल तबाह हो गई, लेकिन टेल एरिया में खेती-किसानी करने वाले किसानों के धान फसल के लिए वर्षा फायदेमंद साबित हुआ। वर्षा थमते ही बोता पद्धति से किसानी करने वाले किसान अपने खेतों में निंदाई शुरू करा दिया है, क्योंकि खेतों में अधिक खरपतवार है। खेतों में पर्याप्त पानी भरे होने से निंदाई तेजी से होने लगा है। वहीं तेज धूप वाले मौसम के बीच निंदाई में तेजी आ गई है। धमतरी जिले में करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सबसे ज्यादा किसान बोता पद्धति से धान फसल लेते हैं, इसमें सबसे अधिक नगरी व मगरलोड ब्लाक के किसान शामिल है, जहां निंदाई इन दिनों जोरो पर है। वहीं पौधों के विकास के लिए वर्षा थमने के बाद किसान अपने खेतों में डीएपी, यूरिया समेत अन्य खाद का छिड़काव कर रहे हैं, ताकि पौधों का तेजी से विकास हो सके।

150 से 170 रुपये रोजीः किसान गंगाराम साहू, पुरूषोत्तम राम, भुवन राम, घनश्याम साहू और जगतराम का कहना है कि अंचल में वर्षा थमने के बाद निंदाई एक साथ शुरू हो गया। ऐसे में किसान व मजदूर निंदाई में व्यस्त है। निंदाई के लिए मजदूरों का टोटा बना हुआ है। बड़े किसान 30 से 40 किलोमीटर दूर गांवों से निंदाई कराने के लिए पिकअप में सवार कर काम कराने मजदूर ला रहे हैं। वहीं प्रति मजदूरों को 150 से 170 रुपये तक मजदूरी दे रहे हैं। किसान चाहते हैं कि समय से पहले उनके खेतों की निंदाई हो जाए, तो पौधों का विकास तेजी से होगा। उत्पादन भी अच्छा होगा। इस संबंध में कृषि उप संचालक मोनेश कुमार साहू ने कहा कि वर्षा थमने के बाद अब धूप वाला मौसम खेती-किसानी के लिए बेहतर है।

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