धमतरी। कोविड-19 के दौरान दो वर्ष से पढ़ाई से वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए खेल- खेल में शिक्षा एवं बस्ताविहीन शिक्षा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शनिवार को बैगलेस डे घोषित किया गया है।

लेकिन जिले के अधिकांश स्कूलों में इस खास दिन में भी शिक्षक बच्चों को बस्ता लेकर आने कह रहे हैं, ऐसे में शासन द्वारा बैकलेस डे घोषित करने का कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा।

शहर-अंचल के विभिन्ना स्कूलों में बैगलेस डे पर कार्यक्रम का आयोजन कर बच्चों को खेल- खेल में ज्ञान की बातें सिखाई जानी है। जहां एक और कई स्कूल बैग लेने पर विभिन्ना संकुल स्तरीय खेलकूद, खेल खेल में सीखो कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। तो वहीं धमतरी जिले की चारों ब्लाक में कई ऐसे स्कूल है जहां पर इस खास दिन भी बच्चों को बस्ता लेकर आने कहा जा रहा है।

बच्चे अन्य दिनों की भांति पढ़ाई करते हैं ऐसे में इस दिन की का कोई महत्व नहीं रह जाता है। बच्चों के पालक परमेश्वर वर्मा, मनन साहू, ललित कुमार ने कहा कि शासन स्तर पर चलाई जा रहे इस विशेष कार्यक्रम को लेकर गंभीरता बरते जाने की आवश्यकता है। शिक्षकों को इस दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों को बिना बस्ता लिए ही बुलाना चाहिए ताकि बच्चों को खेल-खेल में ज्ञान की बातें सिखाई जा सके।

मालूम हो कि इस दिन बच्चों को बिना बैग लिए स्कूल पहुंचते हैं और बच्चों को शिक्षक योग, खेलकूद सांस्कृतिक कार्यक्रम, गांव के पढ़े-लिखे युवाओं द्वारा विभिन्ना प्रकार के व्यवसायिक शिक्षा, बच्चों के पालकों के द्वारा कहानी वाचन, बच्चों को रोजगार परख शिक्षा ,कहानी, गीत कविता, संगीत, भजन एवं विविध प्रकार के रोजगार परख शिक्षा का आयोजन किया जाता है।

- बस्ताविहीन शिक्षा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शनिवार को बैगलेस डे घोषित किया गया है

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Posted By: Nai Dunia News Network

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