धमतरी। छत्तीसगढ़ की धरोहर हसदेव अभ्यारण को कोयला खनन के लिए निजी कंपनी को आवंटित करने से बहुजन समाज पार्टी आक्रोशित है। पार्टी के सदस्यों ने कहा कि कोयला खनन के लिए आवंटित करने से आदिवासी समूह, पशु-पक्षी के जीवन पर खतरा मंडराएगा। सरकार का यह निर्णय सही नहीं है। छत्तीसगढ़ की धरोहर को बचाने की मांग को लेकर 23 मई को बहुजन समाज पार्टी जिला धमतरी के सदस्य कलेक्टर पीएस एल्मा से मिले और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।

बसपा जिलाध्यक्ष आशीष रात्रे, ईश्वर नारंग, लालचंद पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का हसदेव अभ्यारण जो एक सौ 70 हजार एकड़ में फैला हुआ है। यहां विभिन्न प्रकार के जानवर, पशु, पक्षी, जंगल, जमीन विद्यमान है। प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ 10 हजार आदिवासी परिवार निवास करते हैं। उस स्थान को कोयला खनन के लिए अडानी को दिया गया है।

उक्त स्थान को कोयला खनन के लिए आवंटित करने से इनके अस्तित्व पर खतरा होगा। यह किसी भी हालत में यहां के किसान होने नहीं देंगे। यहां बड़ी संख्या में हाथी, शेर, भालू, हिरण एवं विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी रहते हैं। यहां वन संपदा भरी पड़ी है। ऐसे स्थान को कोयला उत्खनन के लिए आवंटित करना गलत है। क्योंकि इसी स्थान पर कोयला खनन होने से जल जंगल जमीन एवं जानवरों के अस्तित्व के साथ साथ 10,000 आदिवासी परिवारों के अस्तित्व संकट छा सकता है।

इतना ही नहीं बल्कि पास में बागों बांध है, जिससे केवल कोरबा जिला में उद्योग संचालित है। जांजगीर- चांपा जिले की जीवनदायिनी नदी है जिससे जिले के कृषक कृषि पर निर्भर अपनी जीविका चलाते हैं। इससे बांगो बांध के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है। हसदेव अभ्यारण को राज्य सरकार व केंद्र सरकार की मिलीभगत षड्यंत्र के तहत कोयला उत्खनन के लिए आवंटित किया गया है जो छत्तीसगढ़ के किसानों व अन्य लोगों के हित में नहीं है। सरकार के इस निर्णय का बसपा विरोध करती है।

बसपा लोगों से अपील करती है कि केंद्र व राज्य सरकार के इस निर्णय का विरोध करे। यह परियोजना यहां हित में नहीं है। कोयला उत्खनन के लिए आवंटन को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही साथ यहां जल संकट की और पर्यावरण बिगड़ने की स्थिति निर्मित हो रही है इस ओर ध्यान दिया जाए। बसपा जिलाध्यक्ष आशीष रात्रे ने बताया कि कोरबा, सरगुजा और सूरजपुर जिले में लगभग एक लाख 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हसदेव अरण्य के जंगलों से लगभग चार लाख से ज्यादा पेड़ों को कोल ब्लाक के विस्तार के नाम से काटा जा रहा है जिससे वहां पर रहने वाले 10 हजार आदिवासियों के उपर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

Posted By: Pramod Sahu

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