राममिलन साहू

धमतरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

लेमनग्रास की खेती से भटगांव की महिलाओं ने समृद्धि की राह तय की है। अपने साथ कईयों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। लेमनग्रास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली चायपत्ती लेमनग्रास ओज-टी ग्राम भटगांव और छाती की महिलाएं बनाकर बेच रही है। इस उत्पाद की मांग प्रदेश के कई जगहों पर है। अब तक एक लाख से ज्यादा की ओज टी बेच चुकी है। गांव की खाली पडी तीन एकड जमीन का महिलाएं सदुपयोग कर रही है।

जिला मुख्यालय धमतरी से दो किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भटगांव की जय मां भवानी महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं लेमनग्रास की खेती कर समृद्धि की ओर अग्रसर है। समूह की 10 महिलाओं को गांव की खाली पड़ी तीन एकड जमीन पर लेमनग्रास की खेती से स्थाई रोजगार मिल रहा है। 27 अक्टूबर को महिला समूह की अध्यक्ष किरण लता साहू, चंद्रिका साहू, रेखा साहू, मनेश्वरी साहू, खेमिन साहू ने बताया कि बिहान योजना ने समूह की महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। लेमनग्रास की खेती से जुड़कर वे आत्मनिर्भरता की ओर हैं। प्रति क्विंटल 700 रुपये मिलता है। प्रत्येक डेढ़ माह में छह से सात क्विंटल लेमनग्रास बेचती है। लेमनग्रास की खेती आसानी से कर लेते हैं। लागत भी कम है। अब तक दो बार कटाई कराकर करीब 12 क्विंटल से अधिक लेमनग्रास बेच चुकी हैं। कच्चा लेमनग्रास को समूह की महिलाएं छाती की दो महिला समूह को सप्लाई करती है। समूह की 30 से अधिक महिला इस लेमनग्रास को सुखाकर और पीसकर लेमनग्रास आज टी बनाती हैं। बिहान योजना के डीपीएम जय वर्मा से मिली जानकारी के अनुसार यहां से निर्मित ओज टी रायपुर, धमतरी समेत प्रदेश के कई जगहों पर बेची जा रही है। इससे छाती की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की ओर है। अब तक 106000 रूपए से अधिक की ओज टी बेच चुकी है। रायपुर के एक फर्म को बेचने के लिए एजेंसी दी गई है, जो कई जगह सप्लाई करती है। इससे कई लोगों को रोजगार मिलने लगा है। कोरोना काल में शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ाने इसकी खूब बिक्री हुई।

गिलोय व एलोवीरा की भी खेती

समूह की महिलाओं ने बताया कि लेमनग्रास के साथ महिलाएं खाली पड़े अन्य जगह पर एलोवेरा, गिलोय, पुदीना, काली मिर्च समेत सब्जी की खेती भी कर रही हैं। इससे इन महिलाओं को अतिरिक्त आय हो रही है। फूल बाड़ी में तैयार होकर बिक्री होने लगी है। 40 रुपये किलो में गेंदा की फूल बेच रही है। इसके अलावा टमाटर, बैंगन, मिर्ची व अन्य सब्जियां हजारों रूपए की बेच चुकी है। इन दिनों बाड़ी में भिंडी, बरबट्टी, ग्वारफल्ली, गलका, कुंदरू, लाल भाजी, पालक, मूली का उत्पादन शुरू हो गया है। समूह की महिलाएं पूरी तरह जैविक खेती करती है। इसलिए लोग बाड़ी पहुंचकर सब्जी खरीदते है। समूह की महिलाएं फेरी लगाकर सब्जी गांव में बेचती है। खेती में गोबर खाद और जैविक पद्धति से निर्मित पदार्थ का उपयोग करते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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