धमतरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

शासकीय महाविद्यालय भखारा में हिंदी सप्ताह के अंतर्गत अंतिम दिन सोमवार 16 सितम्बर को हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। महाविद्यालय में हिंदी भाषण, कविता पाठ, फिल्म समीक्षा, साहित्यिक फिल्म प्रदर्शन आदि विभिन्न आयोजन किए गए।

प्राचार्या डॉ. चंद्रकांता शर्मा ने कहा कि हिंदी दिवस का आयोजन हमें मातृभूमि और मातृभाषा के प्रति अस्मिता का भान कराती है। कॉलेज छात्रा चुमेश्वरी, चांदनी साहू, महेश्वर, लीनीमा, तुलसा, केसरी, दुगेश्वरी ने भी हिंदी दिवस पर कार्यक्रम को सम्बोधित किया। डॉ भुवाल सिंह ठाकुर ने हिंदी भाषा साहित्य की विशाल परम्परा पर अपनी राय रखी। उन्होंने चंदबरदाई, अमीर खुसरो, कबीर, सूर, तुलसी, जायसी, मीरा, घनानन्द, भारतेंदु, महावीर प्रसाद द्विवेदी, पंत, प्रसाद, निराला, महादेवी, नागार्जुन, दिनकर, हरिवंशराय बच्चन से लेकर समकालीन लेखन के विशाल परिप्रेक्ष्य पर विहंगम दृष्टि डाली। उन्होंने हिंदी के विदेशी विद्वानों ग्रियर्सन, फादर कामिल बुल्के को भी याद किया। सात दशकों बाद भी आज संघ लोक सेवा और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं सहित लगभग सभी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में विवाद की स्थिति में प्रश्नपत्र का अंग्रेजी रूप ही क्यों मान्य है। हम आज तक राजभाषा हिंदी में कोई मौलिक प्रश्नपत्र क्यों नहीं तैयार कर सके। यह चिंतनीय है। समानता के नाम पर अंग्रेजी के स्टील प्लांट को इस्पाती पौधा अनूदित करना कौन सा न्याय है, इंडिविजुअल की हिंदी व्यष्टिक करना और मॉडिफिकेशन को आपरिवर्तन कर कौन सा उद्देश्य पूरा किया जा रहा है वह भी संघ लोक सेवा जैसी प्रति्रित परीक्षा में। क्या ये हिंदी माध्यम को हतोत्साहित करने का उपक्रम नहीं है। एक आम आदमी से अपेक्षा की जाती है कि वो जीएसटी जाने, इंटरप्रेनुरेशिप बोले, प्रोटोकॉल फॉलो करे पर वही अधिकारी लोक में बहुप्रचलित शब्दों नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी को बोलना, जानना नहीं सीख पाता या सीखने से कतराता है!राजभाषा हिंदी तभी जीवंत बनेगी जब जनभाषा (लोक) के साथ निरन्तर संवाद करेगी। कार्यक्रम को डॉ संजय शर्मा, रामकिशोर यादव, दिनेश नाग, आनन्द सोनी ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन लोकेश्वर कुमार व आभार प्रदर्शन विभागाध्यक्ष डॉ कविता वैष्णव ने किया।