धमतरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

समर्थन मूल्य में धान खरीदी की तिथि बढ़ने के कारण खेतों से उत्पादित धान को रखने के लिए किसानों की चिंता बढ़ गई है। पहले की तरह किसानों के घर पारंपरिक कोठी नहीं है। मजबूर किसान धान को घर के आंगन व गली में रखने मजबूर है। वहीं कुछ किसान धान कटाई करने के बाद धान रखने जगह नहीं होने के कारण खेतों में ही खरही बनाकर फसल को रखे हुए हैं। खरीदी शुरू होने से कुछ दिन पहले वे मिंजाई करेंगे।

अंचल में धान कटाई-मिंजाई ने जोर पकड़ लिया है। किसान, मजदूर काम में व्यस्त है। मिंजाई शुरू होने के बाद समर्थन मूल्य में धान खरीदी शुरू नहीं होने से उत्पादित धान को रखने किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि पहले की तरह किसानों के घर पारंपरिक कोठी नहीं है। अधिकांश किसान अपने घरों में बनी कोठी को तोड़ चुके हैं। धान बेचने किसानों को अभी 20 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। किसान अपने धान को घर के आंगन, गली व खलिहान में रखने मजबूर हैं। कुछ किसान तो गांवों में निर्मित सामुदायिक भवन, मंदिर परिसर में धान रख रहे हैं, ताकि मौसम खराब होने से धान सुरक्षति रहे। खुले मैदान व खेतों में धान रखने से बारिश का खतरा मंडराता रहता है। श्यामतराई के किसान खिलेश्वर साहू, सांकरा के पुनारद राम, नवागांव के घनाराम साहू ने बताया कि धान रखने घर में व्यवस्था नहीं होने के कारण खेतों की तैयार फसल की कटाई करने के बाद धान के बीड़ा को खेतों में ही खरही बनाकर रखा है। समर्थन मूल्य में धान की खरीदी शुरू होने से एक-दो दिन पहले मिंजाई करेंगे और उत्पादित धान को बेचने सीधे खरीदी केंद्र ले जाएंगे। किसानों का कहना है कि कई बार खेत में रखे धान की खरही पर आग लगने की आशंका बना रहता है, क्योंकि कई असामाजिक तत्व व बीड़ी, सिगरेट पीने वाले लोग वहां आते-जाते रहते हैं।

धान की कर रहे रखवाली

मिंजाई के बाद कुछ किसान उत्पादित धान को खेत व खलिहान में बोरियों में भरकर रखे हुए हैं। कई बार बोरियों में रखे धान को चोर चोरी कर ले जाते हैं। किसान अपने मेहनत से उत्पादित धान की रखवाली कर रहे हैं। धान व खरही के आसपास रात में सोते हुए चौकीदारी भी कर रहे हैं, ताकि कोई अनहोनी न हो। इस साल बेमौसम हुई बारिश के कारण अधिकांश किसानों की धान फसल में अधिक नमी है, ऐसे में किसान कुछ दिनों तक धान को धूप में फैलाकर सूखा रहे हैं, ताकि समर्थन मूल्य में बेचने के समय नमी न आए। नमी आने पर केंद्रों में धान को वापस लौटा दिया जाता है। खरीदी नहीं करने से किसानों को मायूस होना पड़ता है।

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Posted By: Nai Dunia News Network