0 2500 समर्थन मूल्य में धान खरीदने की मांग

फोटो : घनाराम साहू।

धमतरी। नईदुनिया न्यूज

समर्थन मूल्य में धान खरीदी समय पर नहीं होने से किसानों में नाराजगी है। किसानों का धान 2500 रुपये समर्थन मूल्य पर भाजपा-कांग्रेस की सरकार मिलकर खरीदें। किसानों की विभिन्न मांगों को सरकार पूरा करें, नहीं तो आंदोलन करने बाध्य होंगे। यह बात किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष घनाराम साहू ने कही है।

घनाराम साहू का कहना है कि खरीफ सीजन के उत्पादित धान का समर्थन मूल्य में खरीदी प्रदेश समेत जिले में हर साल एक नवंबर व 15 नवंबर से शुरू हो जाता था, लेकिन इस साल काफी लेटलतीफी हुआ है। पहले राज्य सरकार ने एक नवंबर से खरीदी करने की घोषणा की। बाद में 15 नवंबर कर दिया और बेमौसम बारिश को आड़ बनाकर समर्थन मूल्य में खरीदी अब एक दिसंबर कर दिया है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी एक माह देरी हुआ है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।पिछले साल किसानों का धान 2500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिका। समर्थन मूल्य में धान खरीदी लेटलतीफी होने के कारण किसान अब उसी धान को मंडी में 1500 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने मजबूर है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 1000 रुपये का नुकसान हुआ है। किसान खाद, कीटनाशक का कर्ज व मजदूरी देने के लिए मजबूरी में नुकसान खाकर मंडी में धान बेचने मजबूर है। जिलाध्यक्ष घनाराम साहू ने आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने हाथ में गंगा जल लेकर 2500 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य में धान खरीदी, पूर्ण कर्जामाफी और भाजपा शासन काल के दो कार्यकाल का बोनस देने की घोषणा की थी। दूसरी ओर केन्द्र में बैठी मोदी सरकार 2500 रुपये में राज्य सरकार द्वारा खरीदने वाले धान का चावल नहीं खरीदने की बात कहती है। भाजपा के विधायक, सांसद व कार्यकर्ता धान खरीदी के नाम पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के विरोध में प्रदर्शन कर घड़ियाली आंसू बहा रहा है। मोदी सरकार 1800 रुपये में धान खरीदी की बात कर रहा है और चावल नहीं लेने। इस बात को लेकर भाजपा नेता चुप बैठे हैं और किसानों पर सिर्फ राजनीति कर रहे हैं, जो उचित नहीं है। भाजपा सरकार में वर्ष 2009 में हुए किसान कांड में किसानों पर अत्याचार किया गया। कोई भी भाजपा नेता सामने नहीं आया। आज किसानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। पिछले 15 साल में चुनावी घोषणा पूरा नहीं की। सरकार ने कभी पूरा साल बोनस की राशि नहीं दी और न ही किसानों का कर्जा माफ किया। नहर पानी का टैक्स माफ नहीं किया। ऐसे पार्टी नेताओं को किसानों पर बोलने का हक नहीं है। यदि केन्द्र में बैठी सरकार किसान हितैषी है, तो वे राज्य सरकार के साथ किसानों का धान 2500 रुपये समर्थन मूल्य में खरीदें। भाजपा व कांग्रेस दोनों मिलकर किसानों की समस्याओं का हल करें।

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Posted By: Nai Dunia News Network