Dhamtari News: धमतरी। शहर व गांवों में मंदिर, स्कूल व कई ट्रस्ट के पास खेती जमीन है, जिन्हें किसान रेगहा व अधिया पर लेकर खेती-किसानी करते हैं। ऐसे 59 किसानों का पंजीयन समर्थन मूल्य पर धान बेचने किया गया है, लेकिन इन किसानों को समर्थन मूल्य में धान बेचने के बाद अंतर की राशि नहीं दिया जाएगा। यही वजह है कि बांध क्षेत्र में लीज पर लेकर खेती-किसानी करने वाले सैकड़ों किसानों को पिछले साल के बोनस की राशि नहीं मिली है। समितियों के प्रबंधकों व कर्मचारियों ने बताया कि ऐसे छोटे किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने तय रेट पतला 2060 रुपये व मोटा 2040 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाएगा, लेकिन इन किसानों व ट्रस्टों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत मिलने वाली अंतर की राशि का लाभ नहीं मिलेगा, यह शासन के गाइड लाइन में तय है।

सैकड़ों किसान इसी तरह करते हैं खेती

धमतरी, कुरूद, नगरी और मगरलोड ब्लाक में 370 ग्राम पंचायतें है, जहां करीब 624 गांव है। इन गांवों में मंदिर, स्कूल व कुछ ट्रस्ट के नाम पर खेती जमीन है। ज्यादातर स्कूलों के पास खेती जमीन है। इस जमीन को हर साल गांव व शहर के किसान लीज पर लेकर खेती-किसानी करते आ रहे हैं। खेती-किसानी के बाद उत्पादित धान को बेचने के लिए शासन ने अधिहा-रेगहा, भूमि प्रदाता के तहत जिले में 59 लोगों का पंजीयन समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किया गया है, जो धान बेच रहे हैं।

किसान व लीज लेने वाले के बीच समझौता

उल्लेखनीय है कि ज्यादातर बड़े किसान अपने खेतों को रेग व अधिया पर अन्य किसानों को खेती-किसानी करने दे देते हैं, ऐसे किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने अपना पंजीयन स्वयं कराते हैं। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि आने पर बराबर हिस्सा में किसान व लीज पर खेती करने वाले आपस में बांटते हैं, यह समझौता धान बोने से पहले जमीन मालिक व खेती करने वाले किसान के बीच होता है। ऐसे में दोनों लाभान्वित होते हैं। यदि रेगहा व अधिया के नाम पर पंजीयन कराकर धान बेचेंगे, तो इन किसानों को बोनस का लाभ नहीं मिलेगा।

पिछले साल का नहीं मिला लाभ

बेलरगांव, भूमका, बनोरा, देवखुटपारा, भुरसीडोंगरी, आमगांव व घुरावड़ अमोली के किसान 21 नवंबर को कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत की कि उन्हें पिछले साल के अंतर की राशि नहीं दिया गया है। खातों पर राशि जमा नहीं हुआ है, जबकि अन्य किसानों को दिया गया है। ये सभी किसान जल संसाधन विभाग के जमीन को लीज पर लेकर खेती-किसानी करते हैं। हालांकि इन किसानों का समर्थन मूल्य पर धान बेचने पंजीयन हुआ है। धान बेचने के दो साल तक बोनस की राशि भी मिला, लेकिन पिछले साल के अंतर की राशि मिलना बंद हो गया है, इससे वे परेशान हैं।

गाइड-लाइन में प्रावधान नहीं

उप पंजीयक कार्यालय सहकारिता विभाग के अधिकारी डा प्रदीप ठाकुर ने बताया कि मंदिर, स्कूल व ट्रस्ट के जमीन बोने वाले किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि देने का प्रावधान शासन से जारी गाइडलाइन में नहीं है। वहीं अधिया व रेगहा बोने वाले किसानों को भी नहीं मिलेगा। राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ सिर्फ पंजीकृत जमीन मालिक को ही मिलने का प्रवधान है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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