धमतरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धमतरी की 14 वर्षीय दिव्यांग चंचल सोनी ने एक पैर से ही माउंट एवरेस्ट के प्रथम बेस कैंप तक 5,364 मीटर ऊंचाई नाप दी। हालांकि यह उंचाई नापना चंचल के लिए आसान नहीं था, क्योंकि जन्म से उसे एक पैर नहीं है। साथ में 60 फीसद दृष्टिबाधित 21 वर्षीय छात्रा रजनी जोशी ने भी चढ़ाई पूरी की। दोनों एग्जेक्ट फाउंडेशन संस्था की छात्रा है।

12 मई को धमतरी पहुंचने पर दोनों का रैली निकालकर शहर के नागरिकों ने स्वागत किया। जगह-जगह नागरिकों, समाजसेवी संगठन, राजनीतिक दलों ने स्वागत अभिनंदन किया। जिला कांग्रेस कमेटी ने घड़ी चौक में दोनों छात्राओं व टीम का स्वागत किया।

लंगड़ी कहकर चिढ़ाते थे बच्चे

चंचल सोनी ने नईदुनिया को बताया कि जब वे काफी छोटी थी, तब वे अन्य बच्चों के साथ खेलना चाहती थी। एक पैर नहीं होने की वजह से कोई भी बच्चा उन्हें अपने साथ नहीं खेलाना चाहता था। उसे बच्चे लंगड़ी कहकर चिढ़ाते थे। जन्मजात एक पैर नहीं होने के कारण परिवार के सदस्य लोग हंसेंगे सोचकर घर से बाहर नहीं निकालते थे।

चंचल जब आठ वर्ष की हुई तो घर पर डांस करना प्रारंभ किया। अब वह मंच पर कार्यक्रम में 15 से 20 मिनट तक एकल नृत्य की प्रस्तुति देती है। घर पर रहकर उसने पेड़ पर चढ़ना प्रारंभ किया। वह अब ऊंचे से ऊंचे पेड़ पर चढ़ने में पारंगत है। पेड़ पर चढ़ते-चढ़ते पर्वतारोहण के प्रति आकर्षण उत्पन्ना हुआ और अब वह एवरेस्ट के प्रथम बेस कैम्प तक चढ़ाई करके आ चुकी है।

जिले को किया है गौरवान्वित

महापौर विजय देवांगन ने इस कठिन लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों छात्रों की मेहनत, लगन और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों ने राज्य एवं जिले को गौरवान्वित किया है। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मोहन लालवानी की चंचल सोनी दत्तक पुत्री हैं। लालवानी ने बताया कि जब से उन्होंने चंचल सोनी को दत्तक पुत्री के रूप में गोद लिया है तब से वह पिता के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। यह गर्व की बात है कि चंचल ने इतना बड़ा साहस दिखाया और रजनी जोशी के साथ दोनों ने रिकार्ड बनाया।

Posted By: Ravindra Thengdi

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