धमतरी। अंचल में रबी फसल की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। खेत की मताई-रोपाई कार्य में व्यस्त किसानों को खेतों में देखा जा सकता है। खेतों में धान की रोपाई तेजी साथ हो रही है। एक साथ कई खेत में रोपाई कार्य शुरू होने से किसानों की समक्ष मजदूरों की समस्या आ खड़ी हुई है। अधिक मजदूरी देखकर किसान खेतों में रोपाई करा रहे हैं। इस साल समय पर सिंचाई पानी देने से भी कई किसान रबी की फसल ले रहे हैं।

शहर सीमा से लगे ग्राम मुजगहन, रत्नाबांधा, लोहरसी, शंकरदाह हरफतराई, डोड़की, गोकुलपुर वार्ड भटगांव, श्यामतराई सहित अन्य गांव में मताई के साथ ही रोपाई तेजी से हो रही है। कई साधन संपन्ना किसान मोटरपंप की सहायता से पहले ही धान की रोपाई कर चुके हैं।

कई किसानों ने बाद में रोपाई शुरू की। खेतों में धान की रोपाई शुरू होने से किसानों के समक्ष मजदूरों की समस्या हो गई है। ऐसे में अंचल के किसान अधिक मजदूरी देकर धान की रोपाई करने विवश हैं। ग्राम परसतराई के किसान जीवराखन सिन्हा, पुसउ साहू, गिरधू साहू ने कहा कि धान की रोपाई के लिए मजदूर मिलना मुश्किल हो गया है। रोपाई कार्य पिछड़ गया है।

अब तक रबी फसल की रोपाई हो जानी चाहिए थी। समय पर रोपाई न होने के कारण धान के उत्पादन पर असर पड़ता है। इन दिनों पुरुष मजदूरी 200 रुपये और महिला मजदूरी 170 रुपये के बीच चल रही है। पिछले साल से इस साल 20 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। मालूम हो कि अंचल के अधिकांश किसान खरीफ फसल के बाद रबी फसल के बाद रूप में भी धान की पैदावार लेते हैं। इस साल समय पर सिंचाई पानी देने से भी कई किसान रबी की फसल ले रहे हैं। धान का समर्थन मूल्य बढ़ने से अधिकांश किसानों का रुझान धान की पैदावार लेने में है।

अधिकांश किसान धान की तेजी से तैयार होने किस्म आईआर 64 का उत्पादन कर रहे हैं। किसान वेदप्रकाश साहू, खूबलाल साहू ने कहा कि धान की रोपाई का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। कुछ किसानों की रोपाई बाकी है। तीन महीने बाद फसल तैयार हो जाएगी। जिन किसानों ने पहले धान की रोपाई की थी उनकी फसल तैयार होने लगी है।

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस धमतरी जिले में 37 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार ली जा रही है।

1500 से 1600 रुपये प्रति एकड़ में मताई का ठेका

किसान महेश कुमार साहू ने बताया कि इन दिनों ग्रामीण अंचल में एक एकड़ रोपाई का ठेका चार हजार से साढ़े चार हजार रुपये के बीच चल रहा है। ट्रेक्टर मालिक अश्विनी सिन्हा ने बताया कि खेत की मताई का ठेका 1500 रुपये से 1600 रुपये प्रति एकड़ में ले रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इसमें बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। गांव -गांव में कई ट्रेक्टर आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

फसल चक्र परिवर्तन से बढ़ती है जमीन की उर्वराशक्ति

कृषि विभाग के उपसंचालक जीएस कौशल ने कहा कि जिले में भूजल के गिरते स्तर को देखते हुए किसानों को धान की जगह रबी फसल के रूप में दलहन-तिलहन उत्पादन लेना चाहिए, क्योंकि धान की फसल के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। फसल चक्र परिवर्तन से जमीन की उर्वराशक्ति भी बढ़ती है। समय-समय पर किसानों को फसल चक्र परिवर्तन के बारे में बताया जाता है।

---

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags