धमतरी (नईदुनिया न्यूज)।

भूपेश सरकार की गोबर खरीद योजना पर तंज कसते हुए पूर्व विधायक इंदर चोपड़ा ने कहा कि छग ही नहीं अपितु पूरे भारत में गोबर ग्राम्य जीवन की अमूल्य धरोहर है। गांवों में बसने वाले किसानों-मजदूरों का जीवन पूरी तरह गाय पर निर्भर है। गौ पालन और कृषि एक दूसरे के पूरक है। प्रातः काल और संध्या के समय जब बरदी में गाय चरने जाती है तो उसके साथ गांव की महिलाएं टोकरी लेकर गोबर बीनने जाती है। उन्हें गोबरहीन कहा जाता है। वो महिलायें गोबर बीन कर उससे कंडे बनाती हैं, जो कि बमुश्किल 300 ग्राम का होता है और उसे ग्रामीण तीन से पांच रुपये प्रति नग के हिसाब से बेचते हैं। गोबर से लीपा हुआ आंगन पवित्र माना जाता है। चोपड़ा ने कहा नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी की बात करने वाली छग की कांग्रेस सरकार की परिकल्पना ही गोबर के बिना व्यर्थ हो जाएगी। क्योंकि गोबर ही नहीं रहेगा तो घुरवा कैसे बचेगा। हर छोटा बड़ा किसान घुरवा में गोबर को एकत्र कर किसान बहुपयोगी खाद बनाता है। डेढ़ रुपया प्रति किग्रा में गोबर खरीदने की राज्य सरकार की योजना प्रदेश के किसानों और मजदूरों के साथ किया गया छलावा है। कोई भी किसान डेढ़ रुपये में इस बहुमूल्य बहुपयोगी गोबर धन को सरकार को नहीं बेचेगा। छग की भूपेश सरकार जिस प्रकार शराब और खनिज में भ्रष्टाचार कर रही है, ठीक उसी प्रकार गौमाता के नाम पर भी वो भ्रष्टाचार का नया मार्ग बनाने का प्रयास कर रही है। गाय हमारे देश मे पूजनीय है और भ्रष्टाचार की नीयत से उसका उपयोग करना पाप है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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