धमतरी। क्वांर नवरात्र की नवमीं तिथि पर शहर सहित अंचल में कई स्थानों पर जंवारा विसर्जन, भंडारा, यज्ञ सहित विविध कार्यक्रम हुए। सभी कार्यक्रमों में माता के भक्तों का उत्साह देखते ही बना। नवमीं पर शहर की आराध्य देवी मां विंध्यवासिनी, गंगरेल की मां अंगारमोती सहित अन्य देवी मंदिरों में माता का दर्शन करने भीड़ लगी रही।

शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन देवी स्थलों पर माता की विशेष आरती हुई। नवरात्र में मां आदिशक्ति की आराधना, मंदिरों में ज्योति जलाने के अलावा घरों में जंवारा बोने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है। पीढ़ी दर पीढ़ी जंवारा की परंपरा का निर्वाह आज तक किया जा रहा है। साल्हेवारपारा स्थित दुर्गा मंदिर, मंदर माई मराठापारा व अन्य देवी मंदिरों के अलावा जंवारा बोने वाले परिवारों ने अपने घर से शोभायात्रा निकालकर आमातालाब में जंवारा विसर्जित किया। शोभायात्रा के दौरान 'जोत जंवारा होथे माता विसर्जन तोर....' छत्तीसगढ़ी जसगीत की धुन पर भक्तगण थिरकते रहे।

बनिया तालाब, शीतला तालाब समेत अन्य तालाबों में भी जंवारा विसर्जन किया गया। जंवारा विसर्जन के दौरान भक्तों का उत्साह देखते ही बना। गायत्री मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में सुबह यज्ञ का आयोजन हुआ। यज्ञ में सभी श्रद्धालुओं ने आहूति डाली। हवन के बाद भक्तों को प्रसादी का वितरण हुआ। यज्ञ की पूर्णाहूति होने के बाद गायत्री मंदिर परिसर में माता के नौ रूपों को नौ प्रतीक स्वरूप भोग लगाने के उद्देश्य से नौ कन्या भोज कराया गया। देवी मंदिरों में हवन के बाद भक्तों ने प्रसादी पाई। कई स्थानों में नौ कन्या भोज भी कराया गया। नौ कन्या भोज के लिए मंदिरों व घरों के आसपास सभी बच्चों को खीर, पूड़ी, हलवा के साथ भोजन कराया गया। पश्चात सबको श्रृंगार सामग्री (चूड़ी, माला, बिंदी, नेलपालिश, रूमाल) के साथ पैसे व श्रीफल भी दिए गए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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