बचेली। औषधीय पौधों को संरक्षित करने की आवश्यकता के प्रति छात्रों को जागरूक बनाने के लिए एनएमडीसी लिमिटेड, बचेली और संतगिरि आश्रम, हैदराबाद के संयुक्त सामाजिक पहल औषधीय पौधारोपण स्कूल अभियान के तत्वावधान में औषधीय पौधा रोपण अभियान का आयोजन 16 नवंबर को डीएवी पब्लिक स्कूल, बचेली में हर्षोल्लास के साथ संपन्ना हुआ। इसमें केंद्रीय विद्यालय के छात्र भी सम्मिलित हुए।

औषधीय पौधा रोपण स्कूल अभियान देश में निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए जागरूकता विकसित करने के लिए एवं स्कूली छात्रों के बीच औषधीय पौधों के संरक्षण की भावना को विकसित करने के लिए है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य औषधीय पौधों का रोपण और संरक्षण को बढ़ावा देना एवं औषधीय पौधों की प्रभावशीलता के बारे में छात्रों के बीच जागरूकता पैदा करना है। पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियां औषधीय पौधों के बारे में ज्ञान का एक विशाल भंडार हैं।

इन पौधों के आशाजनक औषधीय गुणों ने नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ चिकित्सा विकसित करने व प्रतिरक्षा बढ़ाने के माध्यम से रोकथाम के लिए कारगर है। इस पहल के तहत डीएवी और केंद्रीय विद्यालय, बचेली के छात्र-छात्राओं को 1200 से अधिक औषधीय पौधे निश्शुल्क प्रदान किए गये। ताकि बच्चे इन पौधों के फेल और पत्ते से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में जान सकें। इस पहल के तहत छात्रों को औषधीय पौधों को समझने का भी मौका मिला एवं उनके रख-रखाव के लिए जानकारी प्रदान की गई।

एनएमडीसी लिमिटेड, बचेली और संतगिरि आश्रम, हैदराबाद के बीच इस संयुक्त प्रयास से डीएवी और केंद्रीय विद्यालय, बचेली के छात्र-छात्राओं को औषधीय पौधों का मुफ्त वितरण किया गया जो डीएवी पब्लिक स्कूल, बचेली में संपन्नाा हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पी.के.मजूमदार, मुख्य महाप्रबंधक, एनएमडीसी बचेली के हाथों से औषधीय पौधों जैसे की अडलसा, गिलोय, अश्वगंधा, शतावरी आदि के करीब 1200 पौधे को छात्रों के बीच वितरित किए गए।

कार्यक्रम में सुनील उपाध्याय, उप महाप्रबंधक (सीएसआर), एनएमडीसी बचेली ने कहा कि औषधीय पौधों और उनके लाभों के बारे में जन जागरूकता अभी भी कम है। इस चल रहे अभियान के माध्यम से हम युवाओं को भारत के आयुर्वेद की समृद्ध विरासत के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। इस अवसर पर संजय बासु, महाप्रबंधक इलेक्ट्रिकल्स, एनएमडीसी बचेली ने विद्यार्थियों को इस औषधीय पौधों के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर संतगिरि आश्रम के स्वामी प्रणवसुदन ने कहा कि भारत में आयुर्वेद की एक समृद्ध विरासत है, जिसे संरक्षित करने और जनता के बीच प्रचारित करने की आवश्यकता है।

विभिन्ना औषधीय पौधे आयुर्वेद का अभिन्ना अंग

विभिन्ना औषधीय पौधे आयुर्वेद का अभिन्ना अंग हैं। प्रत्येक छात्र को इन पौधों को अपने घरों में उगाना चाहिए और उनका लाभ उठाना शुरू कर देना चाहिए। इस मौके पर पीके मजूमदार, मुख्य महाप्रबंधक, एनएमडीसी बचेली के स्वामी द्वारा रचितध पदममध पुस्तक का विमोचन किया गया जो कि इस सामाजिक अभियान का हिस्सा है, जो हर्बल-औषधीय पौधों के उपयोग और संरक्षण में स्थायी अभ्यास पर एक त्वरित मार्गदर्शिका है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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