धमतरी। जिले के प्रत्येक गोठानों में 250 से 500 ट्राली पराली एकत्र करने कलेक्टर पीएस एल्मा का निर्देश है, लेकिन 280 में से एक भी गोठान में अभी तक पराली दान की शुरुआत नहीं हुई है।

उलटे किसान रबी सीजन में धान फसल लेने के लिए खेतों में पराली जला रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और किसान गोठानों में पराली दान करने दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

जिले के धमतरी, कुरुद, मगरलोड और नगरी ब्लाक के गांवों पर वर्तमान में 280 गोठान संचालित है, इनमें से अधिकांश में पराली की व्यवस्था नहीं है। गोठानों में पराली एकत्र नहीं होने से बारिश के दिनों में मवेशियों को अधिकांश समय भूखा रहना पड़ता है।

पिछले साल कोरोना संक्रमण व लाकडाउन के चलते कई गोठानों में पराली एकत्र नहीं हो पाया, लेकिन इस साल कलेक्टर पीएस एल्मा ने खरीफ धान फसल की कटाई-मिंजाई शुरू होते ही अधिकारियों को बैठक में जिले के प्रत्येक गोठानों में 250 से 500 ट्राली पराली एकत्र करने निर्देश दिए। इसके लिए किसानों, जनप्रतिनिधियों और किसानों को प्रेरित करने कहा है, लेकिन अब तक एक भी गोठान में पराली दान की शुरूआत नहीं हो पाई है।

ज्यादातर गोठान खाली हैं। यहां रखने वाले मवेशियों को अधिकांश समय भूखा रहना पड़ता है। गोठान बनने के पहले ही साल में जनप्रतिनिधियों, किसान व पंचायत प्रतिनिधियों ने जमकर पराली दान किया था, लेकिन इस साल इन लोगों में दिलचस्पी नहीं दिख रहा है। जबकि यह मवेशियों के लिए बेहद जरूरी है।

पराली पर मंडराने लगा खतरा

जिले में 60 प्रतिशत से अधिक खरीफ धान फसल की कटाई-मिंजाई हो गई है। हार्वेस्टर व थ्रेसर से धान फसल की कटाई-मिंजाई करने वाले किसानों के खेतों में पराली बेकार में पड़ा हुआ है। फिलहाल बारिश में भीगने से उसके सड़ने की आशंका बढ़ गई है।

यदि धूप खिलने के बाद पराली एकत्र करो अभियान जिला प्रशासन की ओर से चलाई जाती है, तो प्रत्येक गोठानों में बड़ी मात्रा में पराली एकत्र किया जा सकता है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा गोठानों में पराली एकत्र करने कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है न ही लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।

समय रहते यदि प्रशासन पराली एकत्र करने पहल नहीं करेंगे, तो ज्यादातर किसान अपने खेतों में पराली को जला देंगे। कलेक्टर पीएस एल्मा ने किसानों, जनप्रतिनिधियों व लोगों से पराली दान करने अपील की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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