राकेश शर्मा, नुआपड़ा (नईदुनिया न्यूज)। देश के अति पिछड़े जिलों में शुमार ओडिशा का कालाहांडी जिला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस दफा कारण अकाल पड़ना या भुखमरी नहीं बल्कि एक 27 साल का युवक डुलेश्वर तांडी, रैपर दुले रॉकर है, जिसे लोग ओडिशा का गली बॉय भी कह रहे हैं। जी हां, वहीं दुले रॉकर जिसके रैप गाने इन दिनों सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे हैं।

डुलेश्वर अपने गानों के जरिए शासन व व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। लॉकडाउन में प्रवासी श्रमिकों का दर्द, मीलों दूर घर तक का पैदल सफर, सरकारी योजनों की विफलता, आम जनता से जुड़े गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार से अपने अलग अंदाज में जवाब मांग रहे हैं। उनकी जोशीली आवाज और अल्फाजों में वो दर्द छुपा है, जो लोगों को उनकी ओर खींच रहा है।

सात फरवरी 1993 को कालाहांडी जिले के छोटे से गांव बोदरा में एक गरीब किसान परिवार में घर जन्मे डुलेश्वर को अब बॉलीवुड से बुलावा आया है और उन्हें कई ऑफर भी मिलने लगे हैं। गरीबी, बेरोजगारी और लाचारी को उन्होंने करीब से देखा है। कई रातें रेलवे और बस स्टेशनों पर गुजारी हैं। भूख की पीड़ा ने उन्हें तड़पाया है। सत्ता से सवाल पूछने की बेचैनी इन्हीं हालातों से निकली है। दुले बताते है कि ऐसा भी दिन आया है जब उनके परिवार के पास खाने के लिए अन्न का एक दाना भी नहीं था।

स्कूल के दिनों में दुले रॉकर गांव की मंडली में नाच-गाना,नाटक आदि में हिस्सा लिया करते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कविताएं और गाने लिखना शुरू किया। यहीं से शुरू हुआ दुले का वो सफर जिसने उन्हें आज रैप की दुनिया में एक नया नाम दिया है। डुलेश्वर का सपना था कि वे एक डॉक्टर बने। लेकिन उनके परिवार की वित्तीय स्थितियों के कारण उन्हें उनका यह सपना छोड़ना पड़ा। साल 2013 में उन्होंने भवानीपटना ऑटोनॉमस कॉलेज से केमिस्ट्री में बीएससी की डिग्री हासिल की। गरीबी का संकट गहराता गया।

साल 2014 में उन्होंने अपना खेत गिरवी रखकर विशाखापट्नम में मां की सर्जरी करवाई। 2017 में उनके पिता नीलमणि तांडी का निधन हो गया। जवाबदारियां और बढ़ गई। उन्होंने बोरदा गांव में ट्यूशन पढ़ना शुरू किया। इतने से काम नहीं बना तो वे काम की तलाश में रायपुर (छत्तीसगढ़)चले गए। लोगों को बताया कि वे ग्रेजुएट हैं , नौकरी करना चाहते हैं जवाब मिला ग्रेजुएट है तो क्या हुआ , काम के लिए अनुभव चाहिए। रायपुर के एक होटल में बर्तन धोने व टेबल साफ करने का काम मिला।तनख्वाह मात्र तीन हजार रुपये और साथ में रहना-खाना।

डुलेश्वर कई राज्यों में रिक्शा चलाने से लेकर अखबार बांटने का काम भी कर चुके हैं। वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए दुले लॉकडाउन लागू होने के एक दिन पहले ही अपने गांव लौट आए। दुले ने बताया कि कॉलेज के दिनों में वे जब रैप गीत लिखते थे,तो हर कोई उन्हें मना करता था। 2014 में, पंजाब के किसी व्यक्ति ने फेसबुक पर उसके एक रैप वीडियो को देखा और उन्हें चंडीगढ़ में परफॉर्म करने के लिए बुलाया। 2015 में वे भुवनेश्वर गए। वीडियो बनाने और गाना रिकॉर्ड करने के लिए कई स्टूडियो का दौरा किया। लेकिन, बिना पैसों के बात नही बनी। इनका कहना है कि ऐसे रैप वीडियो बनाने के लिए कम से कम 50 हजार रुपये की जरूरत होती है, जो उनके पास नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर वीडियो बनाने का प्रयास किया।

लॉकडाउन के दौरान गांव में उनकी ये प्रतिभा निखर कर सामने आई। पैदल लौटने को मजबूर प्रवासी मजदूरों की लाचारी को दुले रॉकर ने अपनी आवाज दी। बेहद जोशीले अंदाजा में कड़वी सच्चाईयों से रूबरू कराते उनके सवाल ध्यान खींचने वाले है। अपने आक्रोश को उन्होंने रैप के जरिए दुनिया के सामने लाया। उनके द्वारा गाया गया गाना्रसरकार जवाब दे काफी सुना जा रहा है। अपने एक रैप वीडियो टेलिंग द ट्रुथ में वह राजनेताओं के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहें हैं। किसानों की दुर्दशा को बयां कर रहा दुले रॉकर का गाना हैशटैग फार्मर सुनने लायक है। वहीं अपने गाने इंडियन सोल्जर नेवर गिव उप में वह भारतीय सेना की वीरता और शौर्य का परिचय दे रहें हैं। दुले हिंदी, अंग्रेजी के अलावा स्थानीय कोशली और ओडिया भाषा में गाना गाते हैं।

विशाल हैं रेपर दुले की गायकी से प्रभावित

रैपर दुले की प्रतिभा से प्रभावित होकर बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने ट्वीट करते हुए दुले को उनके संपर्क में रहने को कहा है। विशाल का कहना है कि इस अद्भुत कलाकार के गानों की रिकॉर्डिंग और उन्हें रिलीज करने में हरसंभव मदद करेंगे। वहीं उनके गानों को सुनने के बाद रैपर रफ्तार, विवियन फर्नाडिंस (डिवाइन), अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, ऋचा चड्ढा, गायिका रेखा भारद्वाज, सोना महापात्र, ओडिया गायक ह्यूमन सागर , फिल्म निर्माता व निर्देशक नील माधव पंडा ने रैपर दुले रॉकर की तारीफ की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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