Paddy Crop In Dhamtari: धमतरी। छत्‍तीसगढ़ के धमतरी जिले में धान की फसल तेजी के साथ तैयार हो रही फसल में कीट व्याधियां होने से किसान परेशान हैं। कई जगह कीटनाशकों का भी असर नहीं हो रहा। धमतरी ब्लाक, कुरुद ब्लाक व मगरलोड ब्लाक में धान का उत्पादन आशा के अनुरूप दिखाई दे तो दे रहा है, लेकिन हाल के दौरान में कीट प्रकोप से उत्पादन घटने की आशंका है। वनांचल की स्थिति खराब है। केवल बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसान समय पर बारिश नहीं होने से निराश हैं।

वनांचल के किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। धान फसल में कीट व्याधियों से परेशान किसान कीटनाशक दवा दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं। अंचल में ज्यादातर किसानों ने धान की तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति आई आर 64, 1001, सांभा की बुआई की है। अधिकांश खेतों में इन्हीं किस्म के धान की रोपाई की हुई है। सैकड़ों खेतों में धान के पौधे लहलहा रहे हैं।

डाही, छाती, सेमरा, सेनचुवा, बिजनापुरी, बोड़रा, कसही, हंकारा , अंगारा , खम्हरिया, जुनवानी, डोमा, गुजरा, बिरेतरा, धौराभाठा, रावनगुड़ा, लिमतरा, पुरी, गोपालपुरी, काशिपुरी, सरसोंपुरी, बगदेही, भेंडरवानी, देवरी, सिहाद, चोरभटठी, भुसरेंगा, कन्हारपुरी, बगौद, कुर्रा, कोसमर्रा, भखारा सहित अन्य गांवों में सिंचाई सुविधा संपन्न किसानों की फसल तैयार हो रही है।

ग्राम बिजनापुरी के नरेश पटेल, सुरेश पटेल, भूषण साहू ने कहा कि अभी हाल में हुई बारिश से तैयार हो रही धान फसल में पतीमोड़क, तनाछेदक, माहू हो गया है। मौसम खुलने के बाद धान के पौधों को बढ़ने का अनूकूल माहौल मिल रहा है।

ग्राम डाही के कोमल ठाकुर ने बताया कि कीट व्याधियों से धान की फसल को बचाने के लिए दवा छिड़काव कर रहे हैं। बगदेही के शिव कुमार साहू का कहना है कि कीट व्याधियों से फसल को नुकसान हो रहा है। दवा विक्रेता भुवन दिवाकर ने बताया कि इन दिनों ज्यादातर किसान कीट व्याधियों से बचाव के लिए दवा खरीदने दुकान पहुंच रहे हैं। ट्राइजोफास, मैन्काजेब, मालथियान सहित अन्य दवा की मांग ज्यादा है।

पेनिकल माइट से फसलों को पहुंच रहा नुकसान

मगरलोड ब्लाक के बहुत से गांव के किसान फसलों में पेनिकल माइट बीमारी से परेशान हैं। इस बीमारी के कारण किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम परसटठी व भेंडरी में कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विशेषज्ञ डा. शक्ति वर्मा और पौध रोग विशेषज्ञ डा. वंदना शुक्ला ने अंचल के किसान संतोष साहू, केशराज साहू के खेतों में पहुंचकर इस बीमारी का निरीक्षण किया।

उन्होंने किसानों को इस बीमारी की रोकथाम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही समय में सही कृषि दवाई का उपयोग किया जाए तो बीमारी से रोकथाम हो सकती है। इससे फसलों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है। किसानों की समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विशेषज्ञ अंचल के खेतों का निरीक्षण करने पहुंचे।

मड़वापथरा व बरपानी में 90 प्रतिशत खरीफ धान फसल खराब

वनांचल क्षेत्र में खरीफ फसल का हाल -बेहाल है। समय पर बारिश नहीं होने से पहले ही परेशान थे। कुछ फसल बची थी वह भी बीमारी से खराब हो रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। ग्राम पंचायत कसावाही के आश्रित ग्राम मड़वापथरा व बरपानी के किसान भुनेश्वर उइके, ईश्वर तारम, देवेंद्र कुमार ध्रुव, बलाराम मरकाम, गोपाल राम, मनीराम, कृपाराम ने बताया कि आषाढ़ व सावन माह में पर्याप्त बारिश नहीं होने से बोता धान फसल खेतों में उगने के बाद तेज धूप के चलते लाल हो गई। फसल बढ़ नहीं पाई।

सात से आठ इंच धान के पौधों से अब बालियां निकल रही है, जिसमें अधिकांश उत्पादन बदरा है। मानसून के सहारे खेती होती है। समय पर बारिश नहीं से फसल खराब हो गई है। ज्यादातर किसान बैंकों से ऋण लेकर खेती-किसानी करते हैं, ऐसे में खेतों से उत्पादन नहीं होने से किसान कर्ज नहीं पटा सकेंगे।

कीटनाशक दवा ने दिया धोखा

ग्राम चिवरी के किसान इस बार की धान की फसल को लेकर काफी परेशान हैं। चिवरी के किसान राजेंद्र कुमार साहू, खेलन साहू, विसनुराम साहू, भारत साहू, नीलांबर नगारची, कुंवर लाल, नरेंद्र सेन, जीतू यादव, ठाकुरराम ने बताया कि खेतों में लोकल दवाई डालकर परेशान हैं।

किसानों ने लेमड़ा, हेक्जा, हिरान जैसे दवाई खेतों में डाली पर असर नहीं हुआ। दुकानदार के पास बायर, टाटा, इंडोसेल, नुवान कीटनाशक नहीं है। मांग के बाद भी यह उपलब्ध नहीं हो रहा। चिवरी में ग्राम सेवक आते ही नहीं। इससे धान की बीमारी के बारे में पता नहीं चल पाया।

किसान दवाई दुकान वालों के कहने पर खेतों में दवाई डालकर परेशान हैं। अभी मौसम खराबी के चलते पत्तीमोड़क, मकड़ी में धान के बाल खराब हो रहे हैं। फसल में चाप माहो की बीमारी भी होने लगी है। किसानों ने प्रति एकड़ नौ से 10 हजार के दवाई डाल ली है, मगर बीमारी जा नहीं रही।

विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही खेतों में करें दवा का छिड़काव

मौसम में बदलाव के दौरान फसलों में कीट प्रकोप होना सामान्य बात है। इन दिनों पेनिकल माइट, भूरा मारो की शिकायतें आ रही हैं, इससे बचाव के लिए किसान मनमाफिक तरीके से दवा का छिड़काव न करें। दवा के अधिक छिड़काव से फसल को भी नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही खेतों में दवा का छिड़काव करें। -डाय एसएस चंद्रवंशी, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र संबलपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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