धमतरी। जागरूकता के अभाव में शहर व ग्रामीण अंचलों में कई लोगों ने कोरोना होने के बाद भी जांच नहीं करवाई। सप्ताहभर बाद जब तकलीफ बढ़ी, तो सांस लेने समेत कई शारीरिक कमजोरी होने से अस्पताल व घरों में मौत हो गई।

अब जब केंद्र व राज्य सरकार ने कोरोना से जिन लोगों की मौत हुई है उनके स्वजनों के लिए कई सरकारी योजनाओं की है, तो ऐसे स्वजन अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं। मृत्यु प्रमाण-पत्र में डाक्टरों से कोरोना लिखने अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन अब यह संभव नहीं होने से सिर पीट रहे हैं।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से दहशत फैल गई थी। जब संक्रमण चरम पर था तब हर रोज कोरोना से धमतरी जिले में 10 से 12 लोगों की मौत हो रही थी। इस तरह जिले में प्रथम व दूसरी लहर से अब तक कुल 544 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। इन परिवारों के मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र में अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना का उल्लेख किया है।

जिला अस्पताल के जन्म प्रमाण-पत्र शाखा के नोडल अधिकारी डा जेएस खालसा ने बताया कि कोरोना से मौत होने वाले मृतकों के मृत्यु प्रमाण-पत्र में कोरोना का उल्लेख किया है।

ऐसे मृतकों के पास बकायदा कोरोना रिपोर्ट भी है। वहीं राज्य स्तर के रिकार्ड में इन मृतकों का नाम कोरोना मरीज के रूप में उल्लेखित है। इन परिवारों को केंद्र व राज्य सरकार से घोषित कोरोना महामारी के लिए योजनाओं का लाभ मिलेगा।

जिला स्तर पर कोरोना से अनाथ हुए, पिता व माता की मौत होने वाले बच्चों का एंट्री किया जा रहा है। अब तक धमतरी में दो अनाथ व आठ से अधिक माता-पिता दोनों में से एक खोने वालों को चिन्हांकित कर शासन को भेजा गया है, जिन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ मिलेगा।

सिर पीट रहे स्वजन

कोरोना से मृत अनाथ बच्चों, माता-पिता खोने वाले बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा तथा केंद्र सरकार से भी कुछ घोषणाएं हुई है, इसके बाद से कोरोना होने पर कोरोना जांच नहीं कराने वाले मृतकों के स्वजन अब सिर पीट रहे हैं। क्योंकि कोरोना रिपोर्ट नहीं होने और मृत्यु प्रमाण पत्र में कोरोना नहीं लिखा गया है, ऐसे में उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।

जबकि उनकी मौत सांस लेने में तकलीफ व कोरोना के बाद शारीरिक कमजोरी के चलते हुई है। एक सप्ताह बाद जब वे गंभीर हालत में पहुंचे और कोरोना जांच की गई, तो रिपोर्ट निगेटिव आई और उनकी मौत हो गई। ऐसे स्वजनों को किसी भी शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।

इस संबंध में जिला बाल संरक्षण अधिकारी आनंद पाठक ने बताया कि कोरोना से अनाथ, माता-पिता खो देने वाले बच्चों का एंट्री की जा रही है, जिसमें कोरोना रिपोर्ट मांगी गई है, जिन्हें योजना का लाभ अनिवार्य रूप से मिलेगा। जबकि जिनके पास कोरोना रिपोर्ट या मृत्यु प्रमाण-पत्र में कोरोना का उल्लेख नहीं है, ऐसे परिवारों को योजना का लाभ मिलने की उम्मीद कम है, फिर भी जानकारी शासन को भेजते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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