धमतरी (ब्यूरो)। ग्रीष्मकालीन रबी में धान का रकबा घटकर पिछले साल की तुलना में आधा हो गया है। खरीफ सीजन में कम बारिश होने के कारण सूखे की स्थिति से किसान अब तक नहीं उभर पाए हैं। इस बार बांधों में भी कम पानी होने के कारण सिंचाई पानी नहीं दिया जाएगा। इस वजह से किसान धान की फसल नहीं लगा रहे हैं। सिंचाई सुविधा संपन्न किसान ही फसल उगा रहे है। छोटे और सुविधाहीन अधिकांश किसानों के खेत खाली नजर आ रहे हैं। सिंचाई पानी न मिलने के कारण किसान रबी फसल लगाने दिलचस्पी नहीं ले रहे।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले साल के ग्रीष्मकालीन सीजन में 64940 हेक्टेयर में धान की फसल जिले के किसानों ने उगाई थी। इस बार सिर्फ 30 हजार हेक्टेयर में धान फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मैदानी अमले से जनवरी के पहले सप्ताह में मिली रिपोर्ट के मुताबिक 1 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई जा चुकी है। ज्यादातार सिंचाई सुविधा संपन्न नलकूप वाले किसानों के खेतों में ही धान की नर्सरी तैयार हो रही है। जिनकी नर्सरी तैयारी हो गई है, वे किसान खेतों में पानी भरकर धान के पौधों का रोपा लगा रहे हैं। मगरलोड ब्लॉक के ग्राम चंदना के किसान कृष्णा साहू और कुरुद ब्लॉक के हंचलपुर के किसान तोषण सिन्हा ने बताया कि नलकूप की सुविधा वाले किसानों के खेत में रोपाई चल रही है। ग्रीष्मकालीन फसल में सिंचाई की सुविधा महत्वपूर्ण है। जिन किसानों के पास सिंचाई का स्वयं का साधन हैं या जिन्हें आसपास के खेतों के बोर से पानी मिल रहा है, वे तेजी से धान की रोपाई कर रहे हैं। दूसरी तरफ छोटे और साधनहीन किसानों के खेतों में सन्नाटा पसरा हुआ है। खेत खाली है। जहां किसी तरह की गतिविधि नहीं दिखाई पड़ रही। गंगरेल बांध, मुरुमसिल्ली बांध, दुधावा बांध और सोंढूर जलाशय में पानी कम है। इसलिए इस बार के ग्रीष्मकालीन सीजन में किसानों को बांधों से सिंचाई पानी नहीं दिया जाएगा। इसलिए नहर पानी के भरोसे गर्मी में खेती करने वाले किसानों ने फसल नहीं लगाई है।

दलहन में इजाफा के बाद भी ओवरआल रकबा में कमी

ग्रीष्मकालीन सीजन में इस साल दलहन फसलों का रकबा बढ़ा है। इसके बावजूद ग्रीष्मकालीन फसल का ओवरआल रकबा घट गया है। जिले में इस बार कृषि विभाग ने धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, साग सब्जी 79060 हेक्टेयर में गर्मी फसल लगाने की योजना बनाई है। 51060 हेक्टेयर में फसल लग भी चुकी है। पिछले साल के ग्रीष्मकालीन सीजन में 1 लाख 410 हेक्टेयर में फसल लगाई गई थी। इस बार में 34110 हेक्टेयर में दलहन फसल लगाने का लक्ष्य तय किया गया था। जिसके एवज में 41936 हेक्टेयर में दलहन फसल चना, मूंग, उड़द, कुल्थी, मटर, मसूर, तिवड़ा लगाई जा चुकी है। पिछले साल 25750 हेक्टेयर में दलहन फसल लगाई गई थी। तिलहन फसल का लक्ष्य 6330 हेक्टेयर के मुकाबले 4 441 हेक्टेयर में फसल लगाई गई है। पिछले साल 2620 हेक्टेयर में तिलहन लगा था। दलहन और तिलहन मिलाकर 40440 हेक्टेयर का लक्ष्य बनाया गया है। जिसके विरुद्घ अब तक 46377 हेक्टेयर में बोनी हो चुकी है। पिछले साल 28370 हेक्टेयर में दलहन- तिलहन की बोनी हुई थी। 4750 हेक्टेयर में साग सब्जी बोनी की योजना है, जिसके मुकाबले अब तक 1523 हेक्टेयर में सब्जियां लगाई गई है। 20 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया है।

नदी पानी से उम्मीद

महानदी में बारहों महीना नालीनुमा पानी बहता रहता है। इसी पानी से नदी में खीरा, ककड़ी, कलिंदर, तरबूज, करेला और अन्य सब्जियां उगाई जाती है। इन दिनों महानदी में इसी पानी का उपयोग करते हुए छोटे उत्पादक फसल लेने में जुटे हैं। महानदी में अछोटा पुल के उपर से ली गई इस तस्वीर में रेत पर ली जा रही फसल दिखाई पड़ रही है।

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