दुगली (नईदुनिया न्यूज)। दुगली क्षेत्र में काबिज 17 परिवारों की झोपड़ियों को जलाने व खेतों में लगी धान फसल को वन समितियों द्वारा चराने के आरोप व शिकायत पर जांच करने शासन की टीम पहुंची। सभी पक्षों को सुनने के बाद जांच रिपोर्ट तैयार की। जांच टीम को 17 परिवारों के 1992-93 में काबिज होने का पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल पाया है। ऐसे में आदिवासी परिवारों द्वारा की गई शिकायत व आरोप पर संदेह उत्पन्न होने लगा है।

नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत दुगली में वन अधिकार, झोपड़ियों को जलाने, काबिज जमीन पर लगी धान फसल को चराने समेत विभिन्न मामलों को लेकर 17 से 20 पीड़ित परिवारों ने

जिला प्रशासन में ज्ञापन सौंपकर इसकी शिकायत की थी। कार्रवाई व वन अधिकार पट्टा की मांग को लेकर धरना आंदोलन कर रैली भी निकाली थी। मुख्यमंत्री निवास जाने पैदल मार्च करने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन आश्वासन देकर इन लोगों को रोका गया। इस मामले में छह नवंबर को जांच करने जांच अधिकारी नगरी एसडीएम सुनील कुमार शर्मा, जनपद सीईओ पीआर साहू वनप्रबंधन समिति के सदस्यों और पीड़ित परिवारों से मिलकर वास्तविकता की जानकारी ली। जांच के दौरान अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे और घने वन आबादी और आरक्षित भूमि का मुआयना भी किया। समिति के अध्यक्ष शंकरलाल नेताम, सीताराम नेताम, भागीरथी सोरी, रतेश्वर नेताम से अधिकारियों ने जानकारी ली। इस दौरान 17 परिवारों को आरक्षित वनभूमि पर 2015 से कब्जा करना बताया गया। जिनको 2018 में प्रशासनिक अमला की उपस्थिति में पूर्व में बेदखल कर प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी। वहीं सालभर पहले पुनः अतिक्रमण करने पर शासन प्रशासन को अवगत कराकर 13 अक्टूबर को वनप्रबंधन समिति के सदस्यों द्वारा विधिवत कब्जा हटाया गया। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि जितना भी आरोप लगाए है, वह बेबुनियाद है। कब्जा धारियों के अनुसार वनभूमि में 1992-93 से काबिज हैं, यह कहना गलत है। वहीं ग्राम पंचायत दुगली की वनप्रबंधन समिति को उस वनभूमि का चरागाह के लिए पूर्व में ही वनाधिकार पत्र मिल चुका है। जहां पीड़ित परिवार मनगढ़ंत ढंग से वनाधिकार का दावा कर रहे हैं। वास्तविकता यह है कि जितने भी अवैध कब्जाधारी हैं, वे सभी ग्राम पंचायत दुगली की निवासी हैं। इन परिवारों को घर और बाड़ी की वन अधिकार पट्टा शासन के नियमावली के तहत प्राप्त है, जिसमें स्पष्ट है कि सभी परिवार 13 दिसंबर 2005 के पूर्व से ग्राम पंचायत दुगली के निवासी हैं, जो आज तक निवासरत हैं।

पैतृक जमीन मौजूद

दुगली में बसने से पहले जहां के भी निवासी हैं, वहां इनकी पैतृक जमीन मौजूद है। बारिकी से जांच करने पर वास्तविकता का पता चल जाएगा। सभी पीड़ित परिवारों का आवास है। शत-प्रतिशत परिवारों को इंदिरा आवास एवं प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल गया है। शासन के रिकार्ड में प्रतीक्षा सूची में है। वहीं सभी परिवारों को खाद्यान्न योजना अंर्तगत ग्राम पंचायत दुगली से राशन कार्ड जारी है। वहीं रोजगार मूलक कार्य के लिए जाब कार्ड बना हुआ है, इससे रोजगार उपलब्ध होता रहा है। वहीं पीड़ित परिवार वालों ने झोपड़ी जलाने, फसल नुकसान के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है, जो गलत है। खुद ही मुद्दा बनाने के लिए घास फूंस को जलाए हैं, जो भी आरोप लगाए हैं वह गलत है। आरोप के संबंध में इन परिवारों के पास किसी भी प्रकार का कोई भी सबूत नहीं है। ये लोग वनभूमि और वनों को विनाश करने में तुले हुए हैं। वहीं जांच अधिकारियों ने पीड़ित पक्ष से वास्तविकता जानना चाही। काबिज सन पूछने पर 2015 से उन्होंने बताए। वहीं दुगली की बिरनपारा में निवास करने की बात बताई। साथ ही ग्राम पंचायत दुगली से मूलभूत सुविधाएं प्राप्त करने की बात अधिकारियों को बताई। इस दौरान नगरी एसडीएम ने वनों को सुरक्षित रखने अवैध कब्जा न करने के साथ वनों को बचाने के लिए घने वन आबादी क्षेत्र को छोड़ने की बात कही। इस दौरान बिरगुड़ी एसडीओ हरिश पांडे,नायब तहसीलदार मुकेश गजेंद्र, वनपरिक्षेत्र अधिकारी अनिल वर्मा, राजस्व निरीक्षक रोहित ध्रुव,सहायक परिक्षेत्र अधिकारी ईश्वरी मरकाम,दुगली थाना प्रभारी एमएस ठाकुर, वनरक्षक नरेंद्र नेताम, पंकज उपाध्याय दुगली पटवारी, पंचायत सचिव किसुन भास्कर, कोटवार बलराम टांडेश के दोनों पक्षों के सदस्यों की उपस्थिति रही।

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