सांकरा। प्राथमिक शाला ठोठाझरिया स्कूल भवन सालों से जर्जर हो चुका है, लेकिन शासन से अब तक नई स्कूल भवन के लिए स्वीकृति नहीं मिली है।

कई बार ग्रामीण कलेक्ट्रेट में अधिकारियों, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से स्वीकृति की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों को लेकर कोई गंभीर नहीं है।

विद्यार्थियों को सुरक्षा प्रदान करते हुए ग्रामीण पिछले चार सालों से इस स्कूल को एक ग्रामीण के घर संचालित कर रहे हैं, ताकि जर्जर स्कूल भवन में कोई अनहोनी न हो।

नगरी ब्लाक मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर सघन वनांचल क्षेत्र में बसे ग्राम पंचायत फरसगांव के आश्रित ग्राम ठोठाझरिया में सालों से एक पुरानी बिल्डिंग पर प्राथमिक शाला संचालित है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने से अब स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

स्लैब पूरी तरह से खराब हो गया है। बारिश होते ही पानी टपकता है। स्कूल परिसर का फर्श गीला हो जाता है। बच्चों के उपर स्लैब का छोटा-छोटा टुकड़ा गिरता था। बदहाल स्कूल भवन की जानकारी अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को देने के बाद भी आज तक नए स्कूल भवन की स्वीकृति नहीं दी है।

इस जर्जर स्कूल भवन में बिठाकर विद्यार्थियों को पढ़ाई कराना उचित नहीं था। सुरक्षा के मद्देनजर पिछले चार सालों से यह स्कूल एक ग्रामीण के घर संचालित हो रहा है, ताकि विद्यार्थी सुरक्षित रहे और बेहतर ढंग से पढ़ाई हो सके।

25 विद्यार्थी करते हैं पढ़ाई

ग्रामीणों ने बताया कि इस स्कूल में कक्षा पहली से पांचवी तक 25 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। ग्रामीण के घर स्थानाभाव के कारण सभी को एक ही कक्षा में बिठाकर पढ़ाया जाता है। इधर मकान मालिक हर रोज शिक्षकों को मकान खाली कराने दबाव बनाता है।

यदि शिक्षक मकान खाली कर देता है, तो स्कूल कहां संचालित किया जाएगा, यह बड़ी परेशानी बनी हुई है। ऐसे में चाहकर भी शिक्षक मकान खाली नहीं कर रहा है। कई बार शिक्षकों ने भी अपने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर नए स्कूल भवन के लिए शासन को पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक स्वीकृत नहीं हुई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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