धमतरी। कोविड-19 के वायरस को परास्त करने देश, प्रदेश सहित जिले में भी तेजी से टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसके तहत फंटलाइन वर्कर्स के बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, उसके बाद 45 वर्ष से अधिक उम्र वालों के बाद अब 18 वर्ष से अधिक आयु श्रेणी के सभी वर्ग के लोगों का टीकाकरण अभियान आठ मई से प्रारंभ हो गया है। इसके लिए जिले में 35 टीकाकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं।

टीकाकरण के जिला नोडल अधिकारी डा बीके साहू ने बताया कि आठ मई से 18 साल से अधिक उम्र वाले सभी वर्ग के लोगों का टीकाकरण प्रारंभ हो गया है जिसके अंतर्गत नगरी एवं कुरुद विकासखंड में नौ-नौ, धमतरी ग्रामीण एवं मगरलोड में छह-छह तथा धमतरी शहर में पांच टीकाकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां पर सुबह नौ बजे से ही वैक्सिनेशन का काम चल रहा है।

उन्होंने बताया कि टीका लगवाने को लेकर शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के युवावर्ग में खासा उत्साह देखा जा रहा है। 18 से 44 साल के बीच के युवक-युवती स्वयमेव टीकाकरण केंद्र पहुंचकर टीका लगवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टीका लगवाने के आने वाले ज्यादातर युवा पहले ही अपना आनलाइन पंजीयन करा चुके हैं, इसलिए वैक्सीनेशन का कार्य तेजी से चल रहा है।

आठ मई की दोपहर दो बजे की स्थिति में 50 प्रतिशत लोगों ने कोविशील्ड व कोवैक्सिन के पहले डोज का टीका लगवा लिया है। अब तक 2370 के लक्ष्‌य के विरुद्ध अब तक 1200 लोगों ने टीका लगवा लिया है।

नगर की 83 साल की बुजुर्ग महिला ने लगवाया कोरोना का टीका

वैश्विक महामारी कोविड-19 जहां लगातार अपने संक्रमण का जाल फैला रहा है, वहीं लोग इससे बचने के लिए टीकाकरण के लिए आगे आ रहे हैं। वैक्सीनेशन के लिए युवक-युवती, अधेड़ के अलावा बुजुर्ग भी काफी बढ़-चढ़कर अपनी हिस्सेदारी निभाकर जागरूक नागरिक होने का सबूत दे रहे हैं।

ऐसा ही एक दृश्य आठ मई को जिला अस्पताल में देखने को मिला, जब धमतरी शहर के सुंदरगंज वार्ड की 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने टीके के महत्व को समझते हुए अपना टीकाकरण कराया। सुबह शीलादेवी वाधवानी नाम की बुजुर्ग महिला को व्हीलचेयर पर लेकर उनके पोते-पोती जिला अस्पताल पहुंचे थे।

शीला वाधवानी उम्रदराजी के चलते लगभग चलने-फिरने व बात करने में असमर्थ थीं। इसके बावजूद उन्होंने इशारे से बताया कि वह टीके का दूसरा डोज लगवाने आई हैं और चूंकि वायरस बेहद ही खतरनाक है एवं सिर्फ टीका लगवाकर ही खुद को और परिवार के लोगों को सुरक्षित किया जा सकता है।

जीवन के आखिरी पड़ाव में भी टीका लगवाने के जज्बे को देखकर लोग उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना कर रहे थे कि जब 83 साल की आयु में श्रीमती वाधवानी ने अपना जीवन सुरक्षित रखने की बात सोच सकती हैं तो युवापीढ़ी क्यों नहीं? वह हंसी-खुशी टीका लगवाकर अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थीं।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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