टी.सूर्याराव

भिलाई (नईदुनिया प्रतिनिधि)। लौकी, कुंदरु, कुम्हड़ा, बरबट्टी, करेला, मिर्ची, खीरा जैसी फसल एक से 10 अगस्त तक हुई बारिश से पूरी तरह चौपट हो गई है। दुर्ग जिले में 500 एकड़ में लौकी, 600 एकड़ में करेला, 400 एकड़ में खीरा, 100 एकड़ में बरबट्टी, 100 एकड़ में मिर्ची, 200 एकड़ में कुंदरु, 100 एकड़ गलका की फसल किसानों ने ली थी। लेकिन एक से 10 अगस्त तक लगातार हुई बारिश के कारण 80 प्रतिशत फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। दुर्ग जिले में 10 हजार एकड़ में अलग-अलग फसल किसान लेते हैं।

दुर्ग के किसानों द्वारा उगाई फसल को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र के नागपुर, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भेजी जाती है। किसानों को बारिश के हुए नुकसान की भरपाई को लेकर चिंता सता रही है। खेती के लिए उन्होंने कर्ज लिया था। जिसके चलते वे परेशान हैं। वहीं खुले बाजार में सब्जियों के दाम काफी बढ़े हुए हैं। इस समय खुले बाजार में सब्जियों की 40 से लेकर 60 रुपये प्रति किलो तक है।

पिछले दिनों लगातार हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है । दुर्ग जिले के किसानों द्वारा अपने - अपने खेतों में लगाई गई फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है । किसानों के समक्ष अब सरकार से सहायता की उम्मीद है । वहीं सब्जी बाजार में उठाव के बावजूद किसान सब्जी नहीं भेज पा रहे हैं क्योंकि उनके खेतों में लगी सारी फसल सड़ चुकी है। दुर्ग जिले के किसानों को इस बार उम्मीद थी कि सब्जियों की डिमांड देशभर में काफी अधिक होगी । ऐसे में लागत के अलावा मुनाफा भी कमा सकेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया ।

पूरी उपज चौपट हो गई

जिला फल सब्जी उत्पादक किसान संघ के अध्यक्ष रितेश टांक ने कहा कि दुर्ग जिले में किसानों ने 2000 एकड़ में सब्जी की फसल ली थी जो पूरी तरह चौपट हो गई है । अब किसानों को नई फसल के लिए 45 दिनों का इंतजार करना होगा। उसके बाद ही स्थिति ठीक हो पाएगी । किसानों ने नई फसल लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

Posted By: Pramod Sahu

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