दुर्ग। नईदुनिया प्रतिनिधि

नामांकन पत्रों की जांच के बाद अब नाम वापसी के लिए दो दिन का समय रह गया है। ऐसे में प्रमुख दल के उम्मीदवार यह आंकलन करने का प्रयास कर रहे हैं कि निर्दलीय प्रत्याशियों से किस दल को कितना फायदा और नुकसान हो सकता है। इस आंकलन के बाद नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए निर्दलीयों पर नाम वापसी अथवा मैदान में डटे रहने के लिए दबाव बनाया जाएगा।

शनिवार को दुर्ग निगम चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच का काम पूरा हो गया। नामांकन पत्रों की जांच के बाद वार्डों में कितने प्रत्याशी मैदान में है यह स्पष्ट हो गया। नाम वापसी सोमवार को दोपहर तीन बजे तक होना है। वैसे तो दुर्ग निगम चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के प्रत्याशियों के बीच है। लेकिन दोनों दलों से टिकट से वंचित कई लोगों ने नामांकन भर दिया है। खासकर टिकट कटने से नाराज भाजपा के वर्तमान पार्षदों सहित करीब 13 लोगों ने बागी नामांकन भरा है। इसी तरह कांग्रेस में भी बागियों की संख्या आठ से 10 बताई जा रही है। इसके अलावा प्रत्येक वार्ड में दो से तीन ऐसे निर्दलीय अभ्यर्थी भी मैदान में है जो कभी कांग्रेस व भाजपा से जुड़े रहे। चूंकि महापौर का निर्वाचन पार्षदों के माध्यम से होना है इसलिए कांग्रेस व भाजपा अधिक से अधिक वार्डों में अपने पार्षदों को चुनाव जीतवाने का प्रयास करेगी। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों दल अपने-अपने दलों के बागी और पूर्व में पार्टी से जुड़े रहे निर्दलीय प्रत्याशियों के वार्डों में पकड़ के बारे में जानकारी ले रही है। मैदानी स्तर पर मिले फीडबैक के आधार पर दोनों दल यह प्रयास करेंगें कि किस अभ्यर्थी के मैदान से हटने पर उनके प्रत्याशी को फायदा पहुंच सकता है इस आकंलन के आधार पर ऐसे अभ्यर्थियों से नाम वापसी का प्रयास कराया जाएगा। वहीं दूसरे पार्टी के प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने वाले अभ्यर्थी मैदान में डटे रहे इस दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।

मान मनौव्वल का लगाए हैं आस

पार्टी से बागी चुनाव लड़ने वाले कुछ अभ्यर्थी मान मनौव्वल का भी आस लगाए बैठे हैं। लेकिन प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस व भाजपा ने मान मनौव्वल को लेकर अभी तक अपने पत्ते नहीं खोला है। इस कारण ऐसे अभ्यर्थी दुविधा की स्थिति में भी है। वहीं कुछ अभ्यर्थी बी फार्म जमा होने तक टिकट मिलने की भी आस लगाए हुए हैं। वे अपने स्तर पर पार्टी नेताओं के माध्यम से प्रयास भी कर रहे हैं। लेकिन इसकी उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

बागियों को उम्मीद बिगाड़ सकते हैं समीकरण

प्रमुख दलों से पार्षद रहे ऐसे अभ्यर्थी जिनको इस चुनाव में पार्टी ने टिकट न देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है वे जीत हार के समीकरण का गोठी बैठाने में लगे हुए हैं। इनका मानना यह है कि यदि वे नहीं जीत पाएं तो सामने वाले को हर हाल में पराजित कर ही देंगे। बागी इसी समीकरण पर रणनीति बना रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network