दुर्ग। नईदुनिया प्रतिनिधि

मानव तस्करी के संदेह में शालीमार कुर्ला एक्सप्रेस के एस-8 कोच में यात्रा कर रहे 13 बच्चों को दुर्ग रेलवे स्टेशन में शनिवार को उतारा गया। ट्रेन में टिकट चेकिंग स्टाफ ने एक युवक के साथ बच्चों को देखा और किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए रेल मंडल व सुरक्षा बल के अधिकारियों के इसकी जानकारी दी। जो युवक, बच्चों के साथ मौजूद था, उसने बच्चों को पढ़ाई के लिए मदरसा ले जाने की जानकारी दी, लेकिन उसके पास इस संबंध में कोई अधिकार पत्र नहीं था। वहीं बच्चों ने भी पूछताछ में मदरसा जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं की। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बच्चों को उतारने के बाद उन्हें अशरफिया में रखा गया है। मामले को जल्द ही चाइल्ड लाइन के समक्ष पेश किया जाएगा। जहां उनके परिजनों को बुलवाकर सुपुर्दगी की कार्रवाई की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 29 जून को शालीमार कुर्ला एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 18030 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर रेल मंडल वाणिज्य विभाग के टी. नाग के नेतृत्व में टिकट चेकिंग कर रहे टीटीई ने गाड़ी के एस-8 कोच के सीट क्रमांक 27-28 बर्थ पर लगभग छह से 14 साल की उम्र के 13 बच्चों को देखा। उनके साथ तजमुल हुसैन नाम का एक युवक था। पूछताछ में उक्त युवक ने सभी बच्चों को बिहार के पूर्णिया जिले के अलग-अलग गांवों से मदरसा ले जाने की जानकारी दी, लेकिन उसके पास कोई अधिकार पत्र नहीं था। हालांकि बच्चों के नाम की आरक्षित टिकट और सभी बच्चों का आधार कार्ड साथ में था।

ट्रेन पहुंचते ही आरपीएफ ने बच्चों को उतारा

सूचना पर रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी दुर्ग और स्थानीय पुलिस की टीम दुर्ग रेलवे स्टेशन में प्लेटफार्म क्रमांक-3 पर ट्रेन के पहुंचते ही बच्चों वे तजमुल हुसैन को गाड़ी से नीचे उतारा। बच्चे मुस्लिम समुदाय के हैं, लिहाजा उन्हें अशरफिया में रखा गया है। अब तक हुई पूछताछ में तजमुल हुसैन ने सिर्फ यह जानकारी दी है कि वह बच्चों को पूर्णिया से हावड़ा तक सवारी गाड़ी से लेकर पहुंचा था। वहां से वो शालीमार-कुर्ला एक्सप्रेस से नागपुर लेकर जा रहा था। नागपुर से बच्चों को यवतमाल जिले के धमनगांव मदरसा ले जाने वाला था।

प्रशासन ने सुपुर्दगी की प्रक्रिया के लिए किया पत्राचार

महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी किरण सिंह ने बताया कि बच्चों को दुर्ग के अशरफिया में रखा गया है। उन्हें चाइल्ड लाइन दुर्ग के समक्ष पेश किया जाएगा। वहीं बिहार के संबंधित जिले के अधिकारी को भी पत्र लिखकर बच्चों के संबंध में जानकारी दी गई है। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद बच्चों को सुपुर्दगी की कार्रवाई के लिए संबंधित जिले की चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया जाएगा। इधर रेलवे पुलिस तजमुल हुसैन से पूछताछ कर रही है। यदि मानव तस्करी की पुष्टि होती है तो कार्रवाई की जाएगी।

राजनांदगांव स्टेशन में भी उतारे गए थे बच्चे

27 जून को पुलिस ने हावड़ा-मुंबई मेल से 33 मुस्लिम बच्चों को राजनांदगांव में रेस्क्यू कर उतारा था। बच्चे एस-5 बोगी में सवार थे। राजनांदगांव पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला सामने आया था कि बच्चे भागलपुर बिहार के थे। उन्हें महाराष्ट्र के बुलडाना क्षेत्र में मदरसे में ले जाया जा रहा था। एक साथ 33 बच्चों की बरामदगी की कार्रवाई की जानकारी शहर में आग की तरह फैली थी। बिना परिजनों के इतने बच्चों की सफर करना काफी संदेहास्पद लगा था। जीआरपी उसकी भी जांच कर रही है।

मदरसा ले जाना बताया गया

शालीमार कुर्ला एक्सप्रेस से 13 बच्चों को उतारा गया। बच्चों के साथ जा रहे तजमुल हुसैन ने प्रारंभिक पूछताछ में बच्चों को पढ़ाई के लिए मदरसा ले जाने की जानकारी दी है। हालांकि उसके पास कोई अधिकार पत्र नहीं था। बच्चों को चाइल्ड लाइन दुर्ग के समक्ष पेश किया जाएगा।

- पुरुषोत्तम तिवारी, प्रभारी आरपीएफ दुर्ग

Posted By: Nai Dunia News Network

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