दुर्ग। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले के दो बड़े निकाय दुर्ग और भिलाई निगम में महापौर का पद सामान्य होने के बाद दावेदारों की लंबी कतार देखने को मिल रही है। वहीं चरोदा भिलाई निगम एससी के लिए रिजर्व किया गया है। दुर्ग निगम में नवंबर-दिसंबर महीने में चुनाव होना है वहीं भिलाई निगम में एक साल बाद चुनाव होगा। लेकिन आरक्षण के साथ ही दोनों निकायों में दावेदारी को लेकर उठा पटक तेज हो गई है। निकाय चुनाव में सत्ता परिवर्तन का असर भी देखने को मिलेगा।

नगर निगम दुर्ग में महापौर का पद इस निकाय चुनाव में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के साथ ही प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस -भाजपा में दावेदारी को लेकर होड़ मची हुई है। क्योंकि पद अनारक्षित होने पर सभी वर्ग के लोग चुनाव लड़ सकते हैं।

निकाय चुनाव के लिए बुधवार को रायपुर में महापौर पद के लिए आरक्षण किया गया। जिसमें दुर्ग निगम में महापौर का पद अनारक्षित कर दिया गया। पद अनारक्षित होने के बाद हर वर्ग के लोग चुनाव लड़ सकते हैं। इससे पहले वर्ष 2004 के नगरीय निकाय चुनाव में दुर्ग निगम में महापौर का पद अनारक्षित वर्ग के लिए था। इसके बाद वर्ष 2009 के निकाय चुनाव में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गया। वर्ष 2014 के नगरीय निकाय चुनाव में महापौर का पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था। इस चुनाव के लिए महापौर का पद सामान्य होने के बाद प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस भाजपा में दावेदारों की होड़ लगी हुई है। भाजपा से वर्तमान महापौर श्रीमती चंद्रिका चंद्राकर,एमआईसी प्रभारी शिवेंद्र परिहार,दिनेश देवांगन,जिला भाजपा अध्यक्ष श्रीमती उषा टावरी,भाजपा महामंत्री देवेंद्र सिंह चंदेल,कांतिलाल बोथरा,चैनसुख भट्टड़ का नाम दावेदारों के रूप में सामने आ रहा है। वहीं कांग्रेस से संयुक्त महामंत्री राजेंद्र साहू,शहर कांग्रेस अध्यक्ष आरएन वर्मा,पार्षद राजेश शर्मा,पूर्व पार्षद देवकुमार जंघेल,सभापति राजकुमार नारायणी,पार्षद अब्दुल गनी का नाम दावेदारों के रूप में सामने आ रहा है। वहीं जोगी कांग्रेस से महापौर पद के लिए अब तक पार्षद डी.प्रकाश की ही दावेदारी सामने आई है।

20 साल से भाजपा का कब्जा

दुर्ग निगम में 20 साल से भाजपा का कब्जा है। महापौर का चुनाव सीधे जनता के माध्यम से कराए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद से दुर्ग निगम में अब तक उक्त पद पर भाजपा का ही कब्जा रहा है। वर्ष 1999 में भाजपा की सुश्री सरोज पांडेय ने कांग्रेस की चंदादेवी शर्मा को पराजित कर किया था। वर्ष 2004 के निगम चुनाव में सुश्री सरोज पांडेय लगातार दुर्ग निगम की महापौर निर्वाचित हुई। इस चुनाव में कांग्रेस ने मदन जैन को प्रत्याशी बनाया था। वर्ष 2009 के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा के डॉ.शिवकुमार तमेर महापौर निर्वाचित हुए थे॥ उन्होंने स्वाभिमान मंच के प्रत्याशी राजेंद्र साहू को हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शंकरलाल ताम्रकार तीसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा से चंद्रिका चंद्राकर महापौर निर्वाचित हुई। उन्होंने कांग्रेस के नीलू ठाकुर को पराजित किया था। उक्त चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी दीपा मध्यानी ने भाजपा-कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी थी।

कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर

प्रदेश में 15 साल से भाजपा की सरकार थी। इस बार नगरीय निकाय चुनाव सत्ता बदलने के बाद हो रहा है। जिसका असर चुनाव पर भी देखने को मिलेगा। दुर्ग मुख्यमंत्री का गृहजिला है। इस लिहाज से निगम की सत्ता में 20 साल से काबिज भाजपा को हटाकर कांग्रेस का महापौर बनाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। सीएम का गृहजिला होने के कारण निकाय चुनाव में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

अब पार्षदों की धुक-धुकी तेज

महापौर पद के लिए आरक्षण होने के बाद अब नगरीय निकाय के वार्डों का आरक्षण किया जाएगा। आरक्षण में कई वार्डों की तस्वीर बदल जाएगी। आरक्षण को लेकर अब पार्षदों की धुक-धुकी बढ़ने लगी है। वार्ड अन्य वर्ग के लिए आरक्षित होने की सूरत में प्रभावित पार्षदों को चुनाव लड़ने के लिए दूसरा वार्ड ढूंढना पड़ेगा।

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