दुर्ग (वि.)। सतत्‌ प्रयास एवं साहस ही जीवन को सफल बनाता है। विद्यार्थियों को सदैव अपने उज्जवल भविष्य के लिए सत्‌त प्रयासरत रहना चाहिए। कभी भी निराशा का भाव मन में नही आना चाहिए।

उक्ताशय के उद्गार छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की पर्याय एवं प्रतीक पद्श्री फुलबासन द्वारा शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग में समाजशास्त्र की स्नातकोत्तर परिषद के उद्घाटन दौरान मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किए। स्वागत भाषण में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र चौबे ने फुलबासन के जीवन संघर्ष का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में औपचारिक शिक्षा दी जाती है, लेकिन फुलबासन का कृतित्व व्यवहारिक एवं सक्रिय ज्ञान की शिक्षा देता है। प्राचार्य डॉ.आरएन सिंह ने कहा कि फुलबासन का जीवन सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। अशिक्षा, गरीबी एवं साधन विहीनता के बाद भी किस प्रकार संघर्ष के द्वारा न केवल अपना बल्कि अपने जैसे लाखों महिलाओं का जीवन कैसे सशक्त बनाया जा सकता है, उसकी आप जिंदा मिसाल है।

मुख्य अतिथि फुलबासन ने अपने अभाव ग्रस्त बचपन और दाम्पत्य जीवन को याद करते हुए बताया कि उनके पास प्रतिदिन भोजन उपलब्ध नहीं होता था और कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता था। पढ़ने की प्रबल इच्छा के बाद भी केवल सातवीं तक शिक्षा मिल सकी। अल्पआयु में ही विवाह के बाद भी जीवन नहीं बदला। तब उन्होंने संघर्र्ष कर अपने जैसी अन्य बहनों का जीवन बदलने की ठानी। वर्ष 2001 में मात्र दो रुपये और दो-दो मुठी चावल के साथ 11 बहनों ने संघर्ष का संकल्प लिया। प्रारंभ में ग्रामीण एवं परिवार ने भी इसका विरोध किया किंतु साहस न छोड़ते हुए महात्मा गांधी के स्वावलंबन एवं सफाई की शिक्षा से प्रेरणा प्राप्त करते हुए गांव एवं स्कूल की साफ-सफाई का स्वतः स्फूर्त कार्य करने लगे तब ग्रामीणों को इनकी प्रति सहानुभूति हुई। राजनांदगांव के तत्कालीन कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव ने आपकी प्रतिभा को पहचाना और उनकी प्रेरणा तथा मार्गदर्शन से प्रज्ञा मां बम्लेश्वरी महिला समूह का गठन हुआ। आज इस समूह से दो लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी है। समूह 40 करोड़ का लाभ अर्जित कर चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, पोषण एवं पर्यावरण रक्षा आदि के क्षेत्र में समूह जो कार्य कर रहा है, उसकी सफलता का अध्ययन करने के लिए देश-विदेश के विश्वविद्यालयों एवं प्रबंध संस्थानों से विद्यार्थी एवं शोधार्थी उनके पास आते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि सदैव प्रयास करते रहना चाहिए। कभी हिम्मत हारनी नहीं चाहिए और समाज के प्रति अपना योगदान अवश्य करना चाहिए। समाजशास्त्र की प्राध्यापक डॉ.अश्विनी महाजन ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ. अनुपमा अस्थाना, डॉ. सोमाली गुप्ता, डॉ. पूर्णा बोस, डॉ. शकील हुसैन एवं अन्य प्राध्यापक गण उपस्थित थे।

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Posted By: Nai Dunia News Network