दुर्ग। नईदुनिया प्रतिनिधि

समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमाधारक के सड़क दुर्घटना में घायल होने पर उसे अनफिट रहने की पूरी अवधि का बीमा दावा ना देते हुए आंशिक दावा भुगतान कर दिया गया। मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर 20 हजार रुपये हर्जाना लगाया है।

मरोदा निवासी लाल साय वर्मा वर्मा छत्तीसगढ़ सहकारी साख समिति मर्यादित का सदस्य है। इस समिति द्वारा अपने समस्त सदस्यों को समूह दुर्घटना बीमा योजना की पॉलिसी दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से जारी करवाई गई थी। 22 मार्च 2017 को सड़क दुर्घटना घायल होने से परिवादी को चोटें आई, जिसका इलाज उसने सेक्टर-9 हॉस्पिटल भिलाई में भर्ती होकर कराया था। परिवादी को अस्पताल में ईएनटी विभाग में 22 मार्च 2017 को भर्ती किया गया। जहाँ उसके चेहरे और दांतों का इलाज चला। विभाग द्वारा नौ दिन का अनफिट प्रमाण पत्र परिवादी को प्रदान किया गया। इलाज के दौरान ही परिवादी को कंधे में दर्द की शिकायत होने से हड्डी रोग विशेषज्ञ द्वारा जांच कराई तो संबंधित चिकित्सक ने एक्सरे की सलाह दी। इसमें कंधे (कॉलर बोन) में फ्रैक्चर निकला तब चिकित्सक ने परिवादी को चार सप्ताह के पूर्ण विश्राम (बेड रेस्ट) की सलाह दिया। इस प्रकार हड्डी रोग विशेषज्ञ ने 31 मार्च से छह मई 2017 तक का अस्वस्थता प्रमाण पत्र प्रदान किया। इस प्रकार परिवादी 22 मार्च से छह मई 2017 तक कुल 46 दिन पूर्णतः अस्वस्थ रहा। लेकिन बीमा कंपनी द्वारा उसे मात्र नौ दिन का ही दावा स्वीकृत कर 3424 रुपये भुगतान किया गया। शेष 37 दिन अनफिट होने की दावा राशि 14800 रुपये का भुगतान नहीं किया गया।

फोरम ने कहा क्लेम का करना होगा भुगतान

परिवादी को दुर्घटना के बाद डॉक्टर द्वारा 22 से 30 मार्च 2017 तक अस्वस्थता प्रमाण पत्र दिया गया था। परिवादी को 31 मार्च 2017 को फिट सर्टिफिकेट दिया गया। एक बार डॉक्टर ने फिट प्रमाण दे दिया हो फिर उसी दिनांक से अनफिट प्रमाण पत्र दिया जाना कैसे संभव है। जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह पाया कि परिवादी के मेडिकल दस्तावेज ओपीडी रिकॉर्ड में सेक्टर-9 हॉस्पिटल में परिवादी के कंधे का एक्स-रे और 30 मार्च 2017 से निरंतर छह मई 2019 तक कराया जाना भी प्रमाणित है इससे यह सिद्घ होता है कि परिवादी 46 दिनों तक पूर्णतः अस्वस्थ रहा। अनावेदक बीमा कंपनी के खिलाफ यह निष्कर्ष निकाला गया कि उसने परिवादी के मेडिकल दस्तावेजों को गहनता से देखे बिना ही आंशिक भुगतान कर दिया जो कि सेवा में निम्नता का स्पष्ट परिचायक है।मामले में फोरम ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर 20800 रुपये हर्जाना लगाया। जिसमें दावा राशि 14800 रुपये, मानसिक परेशानी के एवज में क्षतिपूर्ति पांच हजार रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये परिवादी को अदा करने का आदेश पारित किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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