दुर्ग(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने का अभियान वर्ष 2014 में प्रारंभ हुआ। जिला प्रशासन द्वारा खुले में शौच मुक्ति के लिए जिले के गांवों में घर-घर शौचालय बनाने का काम शुरू किया गया। प्रशासन द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीण अंचलों में घर-घर शौचालय निर्माण के महत्व को बनाने के साथ ही इसके फायदे भी गिनाए गए। अंततः तीन साल की मशक्कत के बाद 26 जनवरी 2017 को दुर्ग जिले को खुले में शौच मुक्त जिला घोषित कर दिया गया।

दुर्ग जिले में दुर्ग,पाटन और धमधा को मिलाकर तीन ब्लॉक हैं। इन तीन ब्लाकों में कुल 388 गांव है। वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन अभियान शुरू होने के पहले जिले के सभी गांवों में अधिकांश लोग खुले में ही शौच के लिए जाते रहे। शहरी बेल्ट से लगे गांवों में खुले में शौच जाने वाले की संख्या ग्रामीणों अंचलों के बनिस्बत थोड़ी कम रही होगी। स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई इस दौरान जिले में कुल 297 ग्राम पंचायत और 388 गांव थे। 26 जनवरी 2017 को जिला खुले में शौच मुक्त घोषित हुआ उस दौरान तक जिले में 80 हजार 302 शौचालय का निर्माण किया जा चुका था। इसके बावजूद जिले के कुछ पंचायतों में घर-घर शौचालय का निर्माण अधूरा रह गया । इसके लिए प्रशासन ने बेस लाइन सर्वे कराया । जिला पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बाद से लेकर अब तक बेस लाइन में छूटे हुए करीब आठ हजार 66 परिवारों के लिए शौचालय बनवाया गया है। शौचालय निर्माण के लिए सरकार द्वारा प्रति हितग्राही 12 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। शौचालय का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन के अलावा मनरेगा के माध्यम से भी करवाया गया है।

घर-घर शौचालय निर्माण के फायदे

.घर-घर शौचालय निर्माण के बाद अब बहू-बेटियों को खुले में शौच के लिए नहीं जाना पड़ता। घरों में शौचालय निर्माण के बाद अब बहू-बेटियां सुरक्षित महसूस कर रही है।

.खुले में शौच से बीमारी फैलने का भी खतरा बना रहता था। मल में बैठने वाली मक्खियां उड़कर घरों के भीतर तक आ जाती है। वे खाने-पीने की चीजों पर भी बैठ जाती हैं।

.ग्रामीण अंचलों में लोग तालाब,डबरी किनारे ही शौच के लिए जाते थे और वहां के पानी को भी प्रदूषित कर देते थे। खुले में शौच मुक्त होने के बाद गांवों में तालाब व डबरी किनारे गंदगी देखने को नहीं मिलती।

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स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निर्मित शौचालय

ब्लॉक का नाम ग्राम पंचायत की संख्या गांव की संख्या निर्मित शौचालय

दुर्ग 72 80 20902

धमधा 116 162 29300

पाटन 109 146 30100

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तीन साल पहले हो चुका है ओडिएफ

दुर्ग जिला खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है। जिले को 26 जनवरी 2017 को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। लेकिन इसके बाद भी जरूरत के मुताबिक घर-घर शौचालय निर्माण का काम किया जा रहा है।

-केके तिवारी अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत दुर्ग

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Posted By: Nai Dunia News Network

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