दुर्ग। छत्तीसगढ़ के किसान अब शहतूत रेशम सिल्क का उत्पादन करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने सरकार द्वारा शहतूत बाड़ी योजना शुरू की जा रही है।

योजना के तहत 50 से 100 किसानों के क्लस्टर में रेशम पौधरोपण कर कीटपालन किया जाएगा। यह योजना लघु एवं सीमांत किसानों के लिए बनाई गई है। उत्पादित रेशम सिल्क के विक्रय की भी व्यवस्था बनाई जाएगी।

किसानों की आय बढ़ाने अब शहतूत बाड़ी योजना शुरू की जा रही है।

शहतूत पौधरोपण करके शहतूत के पौधों पर रेशम के कृमिपालन द्वारा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। प्रत्येक फसल की अवधि 20 से 25 दिन की होगी। कीटपालन के दौरान कृषक को अपने शहतूत बगान से पत्तियों व टहनियों को तोड़कर कीटपालन भवन में कीटों को खिलाना होगा।

22 से 25 दिन में कीट परिपक्व होने के बाद उसे कोलेप्सेबल माउंटेजेस में कोया तैयार करने के लिए छोड़ा जाएगा एवं छठवें दिन कोयों को निकालकर विक्रय के लिए ले जाया जा सकता है। किसान बुनकरों,धागा उत्पादकों एवं व्यापारियों को उत्पादित कोयों को सीधे विक्रय करने के लिए स्वतंत्र होगा।

योजना के लिए तकनीकी सहायता रेशम विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। योजना का क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के 12 जिलों का चयन किया गया है जिसमें रायगढ़,जशपुर,कोरिया,सरगुजा,बलरामपुर,सूरजपुर,कोरबा,जांजगीर-चांपा,कांकेर,कोंडागांव,नारायणपुर एवं जगदलपुर शामिल है। लेकिन ग्रामोद्योग विभाग द्वारा अन्य जिलों में भी उद्यानिकी विभाग को पत्र प्रेषित कर शहतूत पौध रोपण योजना के लिए इच्छुक किसानों के संबंध में जानकारी मांगी गई है।

केंद्रीय रेशम बोर्ड वहन करेगी 80 फीसद राशि

योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ पांच लाख रुपये व्यय करने का प्रावधान है।जिसमें 10 फीसद राशि हितग्राही द्वारा वहन की जाएगी तथा शेष 10 फीसद राशि राज्य सरकार द्वारा एवं शेष 80 फीसद राशि केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा वहन की जाएगी।

इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा अन्य खेती करने पर दिए जाने वाला अनुदान 10 हजार रुपये प्रति एकड़ अलग से देय होगी। योजना से जुड़ने वाले किसानों के पास निजी जमीन होना जरूरी है। इच्छुक किसानों को पौधरोपण एवं रेशम कीटपालन से संबंधित सभी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सालभर में ले सकते हैं पांच से छह फसल

योजना के तहत एक एकड़ क्षेत्रफल में किसान प्रति वर्ष पांच से छह फसलें ले सकता है। विभाग के मुताबिक इस योजना से किसान पहले वर्ष में 40 हजार रुपये, दूसरे वर्ष में 53300 रुपये और तीसरे वर्ष में एक लाख 17600 रुपये तक आय अर्जित कर सकता है। जो किसान उत्पाद स्वयं नहीं बेच पाएंगे विभाग द्वारा ऐसे किसानों का उत्पाद विक्रय के लिए व्यवस्था बनाई जाएगी।

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शहतूत रेशम बाड़ी योजना से छत्तीसगढ़ के किसान भी रेशम सिल्क का उत्पादन कर सकते हैं। यह किसानों के लिए लाभदायक योजना है। रेशम सिल्क की अच्छी डिमांड है किसानों को इसके विक्रय में दिक्कत नहीं आएगी। इस योजना के लिए किसानों को सब्सिडी देने के साथ ही उन्हें तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। योजना का बेहतर प्रतिसाद मिला तो आने वाले वर्षों में राज्य के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।

डा.राजेश बघेल ,अपर संचालक, रेशम

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शहतूत रेशम बाड़ी योजना के लिए फिलहाल इच्छुक किसानों के संबंध में जानकारी मंगाई गई है। जिला स्तर पर किसानों से संपर्क किया जा रहा है।

-सुरेश ठाकुर, उप संचालक उद्यानिकी विभाग दुर्ग

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Posted By: Nai Dunia News Network

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