दुर्ग। शिवनाथ नदी में आई बाढ़ का पानी अब उतरने लगा है। बाढ़ का पानी उतरते ही टापू बने गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं दुर्ग से धमधा और बालोद आवागमन भी शुरू हो गया। महमरा एनीकट के ऊपर अभी भी साढ़े नौ फीट पानी बह रहा है। वहीं नदी किनारे लगाई गई धान और सब्जी फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी फसलों का जायजा लेने पहुंचे।

जिले में 14 व 15 अगस्त को हुई बारिश और राजनांदगाव तथा बालोद जिले के खरखरा व तांदुला जलाशय से छोड़े गए पानी की वजह से शिवनाथ नदी में बाढ़ गया। मंगलवार को बाढ़ का पानी दुर्ग शहर के भीतर घुस गया था। हालांकि देर रात से पानी उतरना शुरू हो गया। बाढ़ की वजह से बंद किए गए दुर्ग से धमधा और बालोद मार्ग पर आवागमन बुधवार को शुरू हो गया। दुर्ग से राजनांदगांव जाने वाले मार्ग को भी आवागमन के लिए शुरू कर दिया गया लेकिन ओवरब्रिज पर दो गड्ढे होने की वजह से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। बाढ़ की वजह से टापू में तब्दील हुए दुर्ग ब्लाक के चंगोरी, रूदा, खाड़ा, आलबरस, भोथली, तिरगा,झोला, धमधा ब्लाक के पथरिया व सहगांव में भी बाढ़ का पानी उतर गया है। एसडीएम मुकेश रावटे ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी आलबरस और भोथली के प्रभावितों को अभी भी राहत शिविर में ठहराया गया है।

साढ़े चार हजार एकड़

में डूबी फसल

शिवनाथ नदी में दस दिन के भीतर दूसरी बार बाढ़ आई है। बाढ़ की वजह से नदी किनारे बसे गांव चंगोरी, रूदा, खाड़ा, भोथली, आलबरस, मोहलई, अंजोरा ढाबा सहित अन्य गांवों में करीब साढ़े चार हजार एकड़ में लगाई गई धान व सब्जी फसल पानी में डूब गई है। मोहलई के किसान कृष्णा देवांगन ने बताया कि उन्होंने दस एकड़ में गोभी फसल लगाया है जो बाढ़ के पानी में डूबकर खराब हो गई। इसी तरह अन्य किसानों ने लौकी, खीरा, टमाटर सहित दूसरी फसल लगाई है। जो पानी में डूब गई है। धान की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचने की संभावना जताई गई है। बुधवार को कृषि विभाग के अधिकारियों ने आलबरस, भोथली सहित बाढ़ प्रभावित अन्य गांवों में पहुंचकर फसलों की स्थिति का जायजा लिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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