धमधा। धमधा के तालाबों के गहरीकरण कार्य में ठेकेदारों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। चौखड़िया तालाब से दलदल व गाद निकालकर पास के मेहतर डबरी में डाली जा रही है। इससे मेहतर डबरी के अस्तित्व पर संकट आ गया है।

नगर पंचायत व्दारा चौखड़िया तालाब से गाद निकालकर उसे नया जीवन दिया जा रहा है, लेकिन उससे लगे दूसरे मेहतर डबरी को ठेकेदार व्दारा पाटा जा रहा है। इस ओर न तो नगर पंचायत के अधिकारियों का ध्यान है और न ही जनप्रतिनिधियों का।

धमधा छै आगर छै कोरी तालाबों के लिए प्रसिद्ध है। कलेक्टर व एसडीएम ने यहां के तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष अभियान छेड़ा है, जिसके तहत छह शासकीय तालाबों को कब्जामुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टार तालाब के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा भी की है।

चौखड़िया तालाब, उजरुवा तालाब और कोष्टा तालाब का गृहरीकरण नगर पंचायत द्वारा कराया जा रहा है। लेकिन इस कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। इन तालाबों पार के अवैध कब्जे हटाए बिना ही सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा चौखड़िता तालाब से निकली मिट्टी को दूसरे तालाब में पाटा जा रहा है।

इससे मेहतर डबरी का एक हिस्सा पट गया है। इसी तरह उजुरवा तालाब की मिट्टी उजरुवा तालाब के पीछे हिस्से में डाल दी गई है, जिससे उजरवा तालाब का क्षेत्रफल छोटा हो गया है। नगर पंचायत द्वारा एक तालाब का गहरीकरण किया जाता है तो उसका मतबा दूसरे तालाब में पाट दिया जाता है।

इसके पूर्व नइया तालाब का गहरीकरण किया गया था तो उससे लगे श्मशान तालाब में डाल दिया गया, जिससे वह तालाब पट गया। इसे लेकर नगरवासियों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि तालाब धमधा की पहचान है, तालाब गहरीकरण तो ठीक है लेकिन इन्हें पाटना कतई उचित नहीं है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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