दुर्ग। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच जिले में टीकाकरण को लेकर लोग परेशान है। वैक्सीन नहीं होने के कारण बुधवार को जिले के सभी टीकाकरण केंद्र बंद रहे। फिर भी लोग वैक्सीनेशन के लिए टीकाकरण केंद्रों में भटकते रहे।

केंद्र के आसपास जो भी नजर आता उनसे वैक्सीनेशन के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास भी करते रहे।पहले जब टीका उपलब्ध था तब लोग इसे लगवा नही रहे थे। अब टीका ही नही है तब परेशान हो रहे है।

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले के कुल आबादी करीब साढ़े 15 लाख है। मंगलवार तक की स्थिति में जिले में वैक्सीन का कुल आठ लाख 81 हजार 390 डोज लगाया जा चुका है। जिसमें पहला और दूसरा डोज लगवाने भी शामिल है। जिले में वैक्सीनेशन का काम 16 जनवरी से प्रारंभ हुआ है।

हेल्थ वर्करों व फ्रंट लाइन वर्करों को पहले चरण में वैक्सीन लगाने का काम शुरू किया गया। इसके बाद अलग-अलग चरण में 60 प्लस,45 प्लस व 18 प्लस आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण शुरू किया गया। जैसे-जैसे वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या बढ़ती गई वैसे ही वैक्सीन की किल्लत शुरू हो गई।

शुरूआती चरण में लोगों ने टीकाकरण को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन को कारगार माना गया है यह समझ में आने के बाद वैक्सीनेशन के लिए भीड़ उमड़ने लगी। वर्तमान में वैक्सीनेशन को लेकर मारामारी की स्थिति बनी हुई है। वैक्सीन मिलने की सूचना मिलते ही सभी टीकाकरण केंद्रों में लोगों की भीड़ उमड़ जाती है। भीड़? भी ऐसी कि लोग कोरोना प्रोटोकाल का भी ध्यान नहीं रख रहे हैं। भीड़ के चलते वैक्सीन एक दो दिन में ही खत्म हो जा रही है।

बुधवार को टीकाकरण केंद्रों में ताला लटका रहा। वैक्सीन नहीं होने के कारण टीकाकरण बंद होने की सूचना भी केंद्रों के बाहर चस्पा की गई थी। बावजूद कई लोग टीकाकरण केंद्रों में वैक्सीनेशन के संबंध में जानकारी लेने पहुंचते रहे। जिसमें आयुर्वेदिक अस्पताल टीकाकरण केंद्र में वैक्सीन लगवाने पहुंचे कुछ लोग केंद्र बंद होने के बाद भी भटकते रहे।

ऐसी स्थिति पोटिया सहित अन्य वैक्सीनेशन सेंटरों में भी देखने को मिली। जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वैक्सीन की डिमांड शासन को भेजी जाती है। वैक्सीन मिलते ही केंद्रों में टीकाकरण शुरू कर दिया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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