दुर्ग। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोविड सहित कई तरह की जांच को लेकर जिला अस्पताल प्रबंधन को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। कोविड जांच की रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने की वजह से कई मरीजों का उपचार शुरू नहीं हो पाया और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। कोरोना के तीसरी लहर की आशंका के बीच इन दिक्कतों से निपटने जिला स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल परिसर में आरटीपीसीआर जांच और वायरोलाजी लैब स्थापित करने की योजना बनाई थी। लेकिन छह महीने बीतने के बाद भी दोनों लैब की स्थापना अब तक नहीं हो पाई है। तीसरी लहर आने की सूरत में प्रशासन को इस बार भी कोविड सहित अन्य जांच को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

जिले में मार्च-अप्रैल महीने में कोरोना की दूसरी लहर आई थी। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग संक्रमित हुए थे। अधिकांश लोगों की आरटीपीसीआर जांच की गई थी। जांच के लिए सैंपल लेकर टेस्टिंग के लिए रायपुर भेजा गया था। लेकिन कई लोगों की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पाई थी। इस कारण इलाज भी शुरू नहीं हो पाया और कुछ लोगों को जान भी गंवानी पड़ी। इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल परिसर में आरटीपीसीआर लैब और वायरोलाजी लैब स्थापित करने की योजना बनाई गई। लैब की स्थापना शासन स्तर पर की जानी है। लैब स्थापित करने अस्पताल प्रबंधन द्वारा मातृ-शिशु अस्पताल के निकट स्थित एक भवन को तैयार किया गया है। लेकिन इस भवन में लैब स्थापना का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वायरोलाजी लैब में डेंगू,इबोला सहित अन्य बीमारियों की भी जांच की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए अलग-अलग करीब 15 मशीनें लगाई जानी है। आरटीपीसीआर व वायरोलाजी लैब स्थापित करने के लिए राशि सीजीएमएससी से दी जानी है। लेकिन फंड की कमी होना बताकर राशि नहीं दी जा रही है।

वायरोलाजी लैब के लिए चि-ति भवन के निकट ही मातृ-शिशु अस्पताल है। उक्त भवन से मातृ-शिशु अस्पताल जाने वाली पहुंच मार्ग जर्जर स्थिति में हैं। बारिश का पानी भरने की वजह से यहां दल-दल हो गया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा वायरोलाजी लैब स्थापना के लिए भवन में कुछ संधारण कार्य कराए जाने के साथ ही उक्त मार्ग का भी संधारण कराए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन अधिकारी इसके लिए सहमति नहीं दे रहे हैं।

जिले में कोरोना संक्रमण दर में रोजाना उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन में पिछले कुछ दिनों से संक्रमित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। तीसरी लहर की आशंका के बीच यदि समय रहते आरटीपीसीआर लैब की स्थापना नहीं हुई तो कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोविड जांच रिपोर्ट को लेकर जिन परेशानियों का सामना करना पड़ा था तीसरी लहर में भी वैसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर लैब खुलने से आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट समय पर मिल पाएगी और संक्रमितों मरीजों का इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा। दूसरी लहर के दौरान कई मरीजों की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट पांच से सात दिन में मिल रही थी। वहीं कुछ ऐसे भी थे जिनकी जांच रिपोर्ट पखवाड़े भर बाद मिली थी।

पी बालकिशोर ,सिविल सर्जन जिला अस्पताल दुर्ग ने कहा कि आरटीपीसीआर और वायरोलाजी लैब स्थापित करने के लिए राशि सीजीएमएससी से मिलनी है। स्थानीय स्तर पर लैब स्थापना के लिए भवन उपलब्ध करा दिया गया है। लेकिन सीजीएमएससी द्वारा फंड की कमी बताकर लैब स्थापित करने का काम शुरू नहीं किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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