दुर्ग (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में पोला का त्यौहार पारंपरिक तरीके से मनाया गया। लोगों ने अपने घरों में मिट्टी से बने बैल,जाता की पूजा की। वहीं जिले के मड़ियापार गांव में पोला महोत्सव का आयोजन किया गया। यहां बैल दौड़ सहित ग्रामीणों के लिए आंचलिक खेलकूद कबड्डी,फुगड़ी,रस्साकसी सहित अन्य आयोजन किया गया।

मड़ियापार में पोला महोत्सव के आयोजन का यह 59 वां वर्ष था। शास्त्री नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित पोला महोत्सव में मड़ियापार,परसदा,लिटिया,सेमरिया,सेवती,अंजोरा सहित आधा दर्जन गांव के ग्रामीण शामिल हुए। पोला महोत्सव में बैल दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। प्रतियोगिता में 48 किसानों के बैल शामिल हुए। प्रतियोगिता में शामिल बैलों को सजाया भी गया था।

प्रतियोगिता में मड़ियापार निवासी अंकालू साहू का बैल प्रथम स्थान पर रहा। दूसरे स्थान पर चिंतामणि और तीसरे स्थान पर महेश निषाद का बैल रहा। चिंतामणि और महेश भी मडियापार के रहने वाले हैं। प्रतियोगिता में जिन किसानों के बैल ने प्रथम,द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया उन किसानों को पुरस्कृत भी किया गया। प्रथम पुरस्कार 10100 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 5001 रुपये और तृतीय पुरस्कार 2001 रुपये प्रदान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डा.सुनील साहू ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विलुप्त हो रहे पांरपरिक खेलों को संजोए रखने के उद्देश्य से पोला महोत्सव का आयोजन किया गया।

पारंपरिक खेलों में महिलाओं व बच्चों ने लिया हिस्सा

मड़ियापार पोला महोत्सव में बैल दौड़ के साथ-साथ अन्य स्पर्धा का भी आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं व बच्चों ने हिस्सा लिया। अन्य स्पर्धाओं में फुगड़ी,रस्साकसी,मटका फोड़,पिट्ठुल,गोला फेंक,कबड्डी, नंदी बैल सजाओ सहित अन्य शामिल है। आयोजन स्थल पर मेले जैसी भीड़ थी।

सेलूद अंचल में छत्तीसगढ़ का पारंपरिक पर्व पोला धूमधाम से मनाया गया। सुबह पूजा अर्चना के बाद बच्च मिट्टी के बैल के साथ खेलते नजर आए। घरों में छत्तीसगढ़ पकवान टेटरी, खुर्मि सहित अन्य पकवान बनाया गया। ग्रांव में रिलो रेस, कुर्सी दौड़, कबड्डी, फुगड़ी सहित अन्य स्पर्धाओं का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर सेलूद, चुनककट्टा, ढौर, अचनाकपुर,राखी, फेकारी, परसाही, धौराभाठा, पेंड्री, मानिकचौरी, बोहारडीह सहित अन्य गांव में भी पोला पर्व परपंरागत तरीके से मनाया गया। उल्लेखनीय है कि बीते दो साल से कोरानाकाल की वजह से यह पर्व भी प्रभावित था। इस वजह से इस साल उत्साह देखने मिला।

Posted By: Pramod Sahu

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close