बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

अप्रत्यक्ष कांड की मुख्य मुख्य कथाओं को जो पूरे सप्ताह तक जो नहीं सुन सके, वे सातवें दिन की कथा का श्रवण करत लाभ ले सकते हैं। इसमें पूरे दिन की कथाओं का सार होता है। भागवत की कथा अभय प्रदान करती है।

ये बातें शनिवार को ग्राम सेलर में चल रही भागतव कथा के सातवें दिन कथा व्यास पं.राजकुमार मिश्रा महाराज ने कही। उन्होंने बताया कि परीक्षित को श्रीमद् भागवत अमृत मान करने के बाद भय मुक्त हो गए। अब उन्हें किसी प्रकार से जीवन व मरण की कोई चिंता नहीं। उन्होंने सर्पराज का स्वागत किया। होनी तो होकर ही रहेगा, हम उसे नहीं टाल सकते। किए गए कर्मों का फल हमें अवश्य भोगना हैं। हां, भगवान की शरण जाने से हम अपने कर्म फल से मुक्त हो जाते हैं और हमें परमात्मा अपनी शरण लेता है और जन्म मरण के चक्र से छुटकारा मिलता है। हमारा वर्तमान, अतीत में हमारा भूतकाल आने वाला भविष्य को निर्धारित करता है। अतीत में किए हुए अच्छे बुरे कर्मों को ही प्रारब्ध के रूप में भोगना पड़ता है। मनुष्य जन्म को भोग योनि कहा गया है। सुख-दुख, अच्छा-बुरा, लाभ-हानि, ठंडी, गर्मी, बारिश सब हमें भोगना ही पड़ेगा। इससे बच नहीं सकते। कर्म की फसल काटनी ही पड़ेगी।

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