गरियाबंद। नईदुनिया न्यूज

नगर में दूसरे दिन भी आवारा कुत्तों का आतंक छाया रहा। दिनभर में आवारा कुत्तों ने और बीस लोगों को घायल कर दिया। दूसरी ओर आवारा कुत्तों के आतंक देखते हुए नगर पालिका प्रशासन को माइक एलाउंस कर लोगों को सतर्क करना पड़ा। सुबह से ही पालिका के कर्मचारियों ने वाहन में घुम-घुम कर एलाउंस किया कि नगरवासी आवारा कुत्तों से सावधान रहे।

ज्ञात हो कि गत वर्ष रायपुर की नगर निगम की टीम ने गरियाबंद से छह किमी दूर कोडोहरदी के जंगल में रायपुर के आवारा और पागल कुत्तों को छोड़ा था। खुले गाड़ी में आने के कारण वे सूंघ तक गरियाबंद तक आ पहुंचे। गत वर्ष भी कुत्तों के कारण नगरवासी परेशान थे परंतु इस बार इन कुत्तों के कारण नगर में आतंक जैसा माहौल है। इन कुत्तों के संपर्क में आने से नगर के अन्य आवारा कुत्तों पर भी असर दिख रहा है वे लोगों को काटने और उन पर झपटने लगे हैं।

वार्डोंममें डंडा लेकर तलाश रही टीम

आवारा कुत्ता के आतंक से नगरवासियो को मुक्ति दिलाने प्रशासन की पहल पर नगर पालिका और पशु चिकित्सकों की 15 से 20 सदस्यीय टीम ने सुबह से छह बजे से नगर के सभी 15 वाडोर् में डंडे लेकर आवारा और पागल कुत्ते की तलाश कर उससे ढूंढने की कोशिश की। दिनभर पालिका के कर्मचारी आवारा कुत्तों की खोजबीन करते रहे। इस दौरान कर्मियों ने एक आवारा कुत्ते को डंडे से पीटकर मार दिया। वहीं अभी भी लोगों को सतर्क रहने की समझाइश दी गई है।

तुरंत लगाएं रेबीज का इंजेक्शन

इस संबंध पशु चिकित्सक कंवर ने बताया कि आवारा कुत्ता को फ्युरिक फार्म और डम फार्म की बीमारी होने के कारण वे लोगों को काटते हैं। फ्युरिक फार्म के कारण कुत्ते के मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और इसके वायरस से सोचने समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुत्तों द्वारा लोगों को दौड़ा दौड़ा कर काटा जाता है। करीब 10 से 12 घंटे इसका असर रहता है। ज्यादातर ऐसे कुत्तों के लार से निकला वायरस अन्य कुत्तों और लोगों में भी फैलता है। जिसका कोई इलाज नहीं है। जबकि डम फार्म में कुत्ता शांत रहता है। उन्होंने लोगों को समझाइश दी कि कुत्तों के काटने के बाद तुरंत रेबीज का इंजेक्शन लगाएं और नियमानुसार चार इंजेक्शन पूरे करे।

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वर्जन

सभी मरीजों को रेबीज का इंजेक्शन लगा गया है। कुत्ते के काटने के तुरंत बाद रेबीज और टिटनेश का इंजेक्शन लगाएं। इसके साथ काटी गई जगह को खुली रखे। गुनगुने पानी और डेटाल से इसकी नियमित सफाई करें।

-डॉ. मनमोहन ठाकुर, चिकित्सक जिला अस्पताल

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