गरियाबंद। नईदुनिया न्यूज

बुधवार रात सर्चिंग में गई जिला पुलिस की टीम को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र ग्राम ताराझर दण्डईपानी के जंगल से बड़ी मात्रा नक्सलियों द्वारा डंप किए गोला बारूद को जब्त किया है। पुलिस संभावना जता रही है कि नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। इसका पर्दाफाश बुधवार को एसपी एमआर आहिरे ने मैनपुर में पत्रकार वार्ता में किया। एसपी ने बताया कि पुलिस को ताराझर दण्डईपानी से लगे जंगल पहाडी में 25-30 में सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सुचना मिली थी।

इसके आधार पर बुधवार शाम उपनिरीक्षक नवीन राजपूत के नेतृत्व में जिला बल और ई (30) के जवान मैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ओडिशा सीमा से लगे ताराझर पहाड़ी की ओर सर्चिंग पर निकले थे। सर्चिंग के दौरान रात को ही पुलिस के जवान नक्सलियों द्वारा पहाड़ी में बनाए ट्रैनिंग कैंप तक पहुंच गए थे। पुलिस के आते देख पहले ही नक्सली से वहां से भाग गए। आसपास सर्चिंग करने पर पुलिस को ट्रेनिंग कैंप स्थल के पास गुफानुमा स्थान में नक्सलियों द्वारा बड़ी मात्रा में डंप किया हथियारों का जखीरा मिला जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। जिसमें 1 देसी रॉकेट लॉन्चर, 1 एयर गन, 2 भरमार बंदूक, 1 देसी रिवाल्वर, 5 नग जिलेटिन, 8 नग जिंदा कारतूस, देसी हैंड ग्रेनेट व हथियार बनाने के औजार तथा नक्सली साहित्य सहित बड़ी मात्रा में दैनिक उपयोगी की सामग्री जब्त की है।

नक्सलियों के पदचिन्ह से पहुंचे कैंप तक

एसपी ने बताया कि नक्सलियों तक पहुचने पुलिस ऑप्स प्लान तैयार किया था। पुलिस नक्सलियों के पदचिन्ह को पहचान लिया और उनका पीछा करते हूए उनके ट्रेनिंग कैंप तक पहुंची। पुलिस की सक्रियता और सर्चिंग के चलते नक्सली अपने मंसूबों पर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। बुधवार को भी नक्सली को मौके से भागना पड़ा। यहां मिले नक्सली साहित्य नक्सली की रणनीति का भी पता चला है। अब पुलिस भी नई रणनीति बनाकर नक्सली को घेरने का प्रयास करेगी। पत्रकारवार्ता में अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक सुखनंद सिंह राठौर, एसडीओपी पुलिस राहुल देव शर्मा, थाना प्रभारी बसंत बघेल, नवीन राजूपत पुलिस के अधिकारी कर्मचारी और पुलिस सर्चिंग के दौरान शामिल जवान उपस्थित थे।

कैंप में बनाते हैं योजना और रणनीति

ज्ञात हो कि तेंदूपत्ता सीजन आने के साथ ही जिले के अंदरुनी इलाकों विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सली की आमद बढ़ जाती है। सीजन भर नक्सली अंदरुनी इलाकों में जमे रहते हैं। इस सीमावर्ती इलाके का उपयोग नक्सली आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडीशा के बीच आने जाने और हथियार पहुंचाने के लिए भी करते हैं। घोर जंगली और पहाड़ी इलाकों में नक्सली ट्रेनिंग कैंप स्थापित कर अपनी योजना और रणनीति बनाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network