देवभोग (नईदुनिया न्यूज)। कोरोना जांच के भय से अब लोगों ने अस्पताल आना भी छोड़ दिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी रजिस्टर को खंगालने पर पता चलता है कि अप्रैल से अब तक मरीजों की संख्या बड़े पैमाने पर घटी रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों की माने तो ऐसा कोरोना टेस्ट डर की वजह से हो रहा है। लोगों में ये डर है कि अस्पताल जाने पर कहीं उन्हें कोरोना जांच कराने के लिए न कहा जाए। इस भय से लोगों ने अस्पताल आना तो दूर शासकीय डाक्टरों से स्वास्थ्य परामर्श लेना भी बंद कर दिया है।

ब्लाक मुख्यालय का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों वीरान हो गया है। सर्दी, खांसी, बुखार सहित अन्य साधारण बीमारियों से ग्रसित मरीज ने उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आना ही छोड़ दिया है। जो मरीज पहले आया भी करते थे अब वे ब्लाक के निजी डाक्टरों से उपचार करवा रहे हैं। अब अस्पताल में केवल दुर्घटना व आपात चिकित्सा से जुड़े मामले ही पहुंच रहे हैं।

27792 घरों में डोर टू डोर सर्वे, अस्पताल पहुंचे केवल 174

जिले समेत ब्लाक में बढ़ते संक्रमितों की संख्या देख जिला प्रशासन ने ब्लाक में 5 से 12 अक्टूबर तक सर्वे अभियान चलाया। इसमें मितानिनों व स्वास्थ्य कार्यकर्ता डोर टू डोर दस्तक देकर लोगों को बीमारी नहीं छुपाने व संक्रमण रोकने के लिए जांच कराने का परामर्श दिए थे। इस सात दिवसीय इस सर्वे में कुल 27 हजार 7 सौ 92 घरों का सर्वे पूरा किया गया था, जिसमें 130 लोगों में कोरोना लक्षण पाए गए थे जिसमें पांच ज्यादा बीमार थे। वहीं स्वास्थ्य विभाग का ओपीडी रजिस्टर बताता है कि इन सात दिनों में सिर्फ 176 मरीज ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। इनमे भी अधिकांश मामले दुर्घटना व आपात चिकित्सा के हैं।

प्राइमरी कांटेक्ट में आने के बाद भी टेस्ट कराने नहीं पहुंच रहे

शासन की तरफ से स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना टेस्ट निश्शुल्क है, लेकिन इसके बाद भी लोग जांच के लिए स्वयं से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। लोगों में जागरूकता की ऐसी कमी है कि लक्षण महसूस करने के बाद भी जांच कराना जरूरी नहीं समझ रहे। बताया जाता है कि जो संक्रमितों के प्राइमरी कांटेक्ट में आए थे वो भी अब जांच के डर से प्राइमरी कांटेक्ट नहीं बताने की मनुहार लगा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के अनुसार प्राइमरी कांटेक्ट से ही कोरोना संक्रमण की चेन ब्लाक में लगातार बढ़ते जा रही है।

ब्लाक का ये गांव कोरोना हॉट-स्पॉट

ब्लाक में इस वक्त 171 ऐक्टिव केस है। जांच न होने की वजह से संक्रमितों की पुष्टि भी नहीं हो पा रही है। अगस्त मध्य से अक्टूबर के शुरुआती सप्ताह में कोरोना संक्रमण तेज हुआ है। इस बीच ब्लाक में तकरीबन 70 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई है। वहीं सामुदायिक संक्रमण की स्थिति के चलते प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। ब्लाक का झाराबहाल, कदलीमुड़ा, बागगोड़ा व सरगीगुड़ा इस समय हॉट-स्पॉट बना हुआ है। साथ ही कुछ अन्य गांव के हॉट स्पॉट होने की आशंका जताई जा रही है।

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वर्सन

अप्रैल माह के पहले तक रोजाना 250 से अधिक मरीज उपचार के लिए अस्पताल आया करते थे, अब इनकी संख्या 20 से 30 में ही सिमट गई है। इनमे भी कोरोना लक्षण दिखने पर चिकित्सक कोरोना जांच कराने की सलाह देते हैं, तो मरीज जांच से साफ इनकार कर देते हैं। केवल गंभीर मरीज ही जांच के लिए राजी होते हैं।

-लव कुमार, ओपीडी प्रभरी सीएचसी

Posted By: Nai Dunia News Network

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