गरियाबंद। 13 जून को कांग्रेस के एक दिवसीय प्रदर्शन कार्यक्रम से नदारद रहने वाले जिले के 20 कांग्रेस जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को जिला अध्यक्ष भावसिंग साहू ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इसके साथ ही इसे अनुशासहीनता मानते हुए इसकी शिकायत प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से करने की चेतावनी भी दी है। इधर नोटिस जारी होने के बाद कांग्रेस ने नए विवाद ने जन्म ले लिया है। सत्ता में होने के बाद भी गुटबाजी और एकजुटता के अभाव से जुझ रही कांग्रेस में फिर से अंर्तकलह शुरू हो गई है। मामले में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और नोटिस पाने वाले जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के बीच भीतरखाने में आपसी विरोध की स्थिति निर्मित हो गई है। दोनों आमने-सामने हो गए है।

ज्ञात हो कि 13 जून को अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ईडी से मिले नोटिस के विरोध में कांग्रेस द्वारा मौन सत्याग्रह धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। मौन धरना प्रदर्शन में जिला एवं ब्लाक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और त्रि-स्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधियों सहित अन्य कार्यकर्ता को मौजूद रहना था लेकिन इनमें अधिकांश लोग शामिल नहीं हुए। हालांकि राजिम विधायक अमितेष शुक्ल सहित कई पदाधिकारी मौजुद थे। लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षाकृत भीड़ नही जुट पाई है। जिसके चलते अपेक्षित भीड़ नही जुटने से खफा जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्यक्रम से अनुपस्थित जनप्रतिनिधियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

इन्हें दिया गया नोटिस

नोटिस पाने वालों में जिला पंचायत अध्यक्ष स्मृति ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू व मधुबाला रात्रे, छुरा जनपद अध्यक्ष चन्द्रकुमारी शाह, फिंगेश्वर जनपद अध्यक्ष पुष्पा जगन्नााथ, पूर्व अध्यक्ष बैसाखुराम साहू, बाबूलाल साहू, राजेन्द्र गुप्ता राजिम, ओमप्रकाश बंछोर फिंगेश्वर, राजकुमारी सोनी छुरा, फिंगेश्वर ब्लाक अध्यक्ष रूपेश साहू, शैलेन्द्र साहू पाण्डुका, गजेन्द्र साहू सरकड़ा, संदीप सरकार पार्षद गरियाबंद, देवा मरकाम पार्षद गरियाबंद, परदेशी राम छुईहा, कालूराल साहू राजिम, राजकुमार साहू राजिम, डिलेश्वर देवांगन गरियाबंद, राजेन्द्र दीवान मड़ेली छुरा शाामिल है।

आमने-सामने हुए कांग्रेसी

कांग्रेस में जिला अध्यक्ष के नोटिस जारी होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यक्रम से नदारत कांग्रेस आमने सामने हो गए हैं। जहां नोटिस और मीडिया को दिए बयान में जिलाध्यक्ष ने सूचना के लिए समाचार पत्रो और विभिन्ना माध्यमों को आधार बताते हुए कहा कि सूचना उपरांत भी बिना कोई जानकारी दिये अति महत्वपूर्ण आयोजन की उपेक्षा करते हुये अनुपस्थित रहे जो कि अनुशासनहीनता है। वही नोटिस मिलने वाले कांग्रेसियों का कहना है कि उन्हे लिखित सूचना नहीं मिली थी ना आने जाने का कोई प्रबंध किया था, लिखित सुचना मिलने के बाद नहीं जाते तो नोटिस जारी किया जा सकता था। वही उन्होंने उल्टा कांग्रेस अध्यक्ष को ही पूछ दिया कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है क्षेत्र में उनके ही विधायक है इन सब के बावजूद कार्यकर्ता स्वयं खर्चे उठाकर किसी भी कार्यक्रम में शामिल होते हैं।

नोटिस भी सवालो के घेरे में

जानकारी के मुताबिक पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा किए गए इस तरह नोटिस को लेकर वे खुद घिर गए हैं। नोटिस में जिले के चिन्हाकिंत जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को नोटिस भेज गया है जबकि कांग्रेस के जिला स्तर और ब्लाक स्तर के कई पदाधिकारी भी कार्यक्रम से नदारत थे। सूत्रो के मुताबिक उनके लिए जिलाध्यक्ष ने कोई नोटिस जारी नहीं किया।

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