देवभोग । देवभोग परिक्षेत्र कार्यालय प्रांगण में राज्य स्तरीय कुसुम लाख प्रशिक्षण का चार दिवसीय आयोजन 18 अक्टूबर से वन विभाग के वन धन ईकाई द्वारा कराया जा रहा है। प्रदेश के जगदलपुर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर,धमतरी, जशपुर, भानु प्रतापपुर,धरमजयगढ़, कांकेर,कोरबा समेत 12 वनमण्डल के लगभग 200 कृषकों के अलावा देवभोग परिक्षेत्र के 12 समिति सदस्य व प्रबंधकों को तकनीकी पद्घति से कुसुम लाख की खेती करने का तरीका बताया गया। डीएफओ मयंक अग्रवाल की मौजूदगी में लघु वनोपज संघ के उप प्रबंध संचालक अतुल श्रीवास्तव , जूनियर एक्जीक्यूटिव कोमल कंसारी के नेतृत्व में यह प्रशिक्षण लाख उत्पादन के विशेषज्ञ डॉ एके जायसवाल द्वारा प्रोजेक्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से दिया जा रहा है। जिसमें कुसुम लाख के उत्पादन के हर पहलूओ को बरीकी से बताया जा रहा है। किसानों के पूछे सभी सवालों के जवाब देकर उन्हें तकनीकी खेती अपनाने के लिए प्रेरित भी किया गया। प्रशिक्षक द्वारा घुमरापदर व खरीपथरा में की गई कुसुम पेड़ के लाख की खेती के अलावा दरलीपारा में की गई बेर पेड़ की लाख खेती का भ्रमण करवाकर खेती की बारीकियों को भी बताया गया।

लाख उत्पादन को सरकार ने दिया है खेती का दर्जा

गरियाबंद वन मण्डल में कुसुम लाख की पारम्परिक खेती वर्षो से हो रही है, पर डीएफओ मयंक अग्रवाल के प्रयास से अब इस लाख की खासियत पर सरकारी मुहर लग गई। डीएफओ अग्रवाल ने बताया कि 2021 के पहले तक ढाई से 3 हजार कुसुम के पेड़ में पंरपरागत तरीके से लाख की खेती गिने चुने किसान कर रहे थे, हमने सर्वे कराया तो यहां कुसुम के 22 हजार पेड़ मौजूद हैं जंहा खेती की भारी सम्भावनाएं हैं। जिन-जिन स्थानों पर किसान तैयार होंगे, वहां लाख की खेती कराई जाएगी। डीएफओ ने बताया की सरकार ने लाख उतपादन को खेती का दर्जा दिया है, इसके उत्पादन के लिए धान फसल की तरह बगैर ब्याज के केसीसी लोन भी मिलेगा। सालाना 10 हजार क्विंटल औसत उत्पादन था, अब इसे बढ़ावा देने किसान व महिला समूहो को विभिन्ना स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। 2022 में लाख प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना देवभोग में हो जाएगी। एक पेड़ में अब तक ढाई से तीन क्विंटल पैदावरी होती थी। तकनिकी खेती से उत्पादन 5 क्विंटल तक पहुंच जाएगा।

विदेश में भी है लाख की काफी मांग

प्रशिक्षण दे रहे विज्ञानी डॉ एके जायसवाल ने कहा कि शिविर के पहले इलाके का बारीकी से अध्ययन किया है। लाख की खेती के लिए अनूकूल मौसम है । यहां पाए जाने वाले लाख विश्व के सबसे उधातम क्वालिटी में शुमार है। देश में राजस्थान, कोलकाता से लेकर विदेश में जर्मनी में इसकी भारी मांग है। कमियां खेती के तरीके में थी, पेड़ का चयन, शत्रु किट की पहचान, समय पर बिहन (बीज) लाख की उपलब्धता अज्ञानतावश किसानों में नहॉ थी। इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें हर पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। एक किलो बीज में 5 किलो लाख के उतपादन के बजाए अब अधिकतम 8 किलो का उत्पादन किसान ले सकेंगे। वन विभाग के प्रयासों से खेती करने वाले किसान व लाख लगाए जाने वाले पेड़ों की संख्या में बढ़ोतरी हुई तो आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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