फिंगेश्वर। आज कल हर तीज त्यौहार को लेकर इंटरनेट मीडिया में तिथियों और तारीखों पर अलग अलग संदेश वायरल होते है। वट सावित्री व्रत को लेकर भी कुछ इसी तरह के मैसेज इंटरनेट प्लेटफार्म पर जमकर वायरल हो रहे हैं, जिससे आम लोगों को शंका हो रही है। विजयशंकर मिश्रा ने इस शंका का समाधान शास्त्र और पुराणों के आधार पर किया है। पंडित मिश्रा ने कहा कि 29 मई रविवार के दिन इस बार वट सावित्री का त्यौहार मनाया जाएगा। पंडित विजयशंकर मिश्रा ने कहा कि आम जन मानस यही समझते हैं कि हर तीज त्यौहार व्रत को उदयातिथि में ही मनाया जाता है। अर्थात जिस तिथि में सूर्योदय होता है उसमें व्रत करना चाहिये लेकिन ऐसा नही है जिस समय का जो व्रत होता है, उस तिथि की व्याप्ति देखी जाती है, न कि सूर्य की उदय तिथि। हर व्रत का समय काल अलग अलग होता है।

कई प्रकार के होते है व्रत

पंडित मिश्रा ने बताया कि व्रत कई प्रकार के होते है। जैसे सौरव्रत-सूर्योदय से, चंद्रव्रत-चन्द्र उदय से, प्रदोष कालिक-सूर्यास्त के समय, निशीथ कालिक-मध्य रात्रि में, पर्व कालिक-उत्सव के रूप में वर्ष में 1 बार होते है। इन व्रतों में व्रत की तिथि का संयोग अपेक्षित है। उदाहरण के तौर पर व्रत पूर्णिमा प्रायः हर बार चतुर्दशी तिथि में ही आता है लेकिन चंद्रोदय के समय पूर्णिमा रहती है। यह चांद्रव्रत है। चंद्रोदय के समय पूर्णिमा होनी चाहिए। सूर्योदय से इस व्रत का कोई मतलब नहीं। इसी तरह गणेश चतुर्थी व्रत प्रायः हर बार तृतीया तिथि में ही आता है। लेकिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी ही रहती है। सूर्योदय से इस व्रत का कोई मतलब नहीं है। इसी तरह अन्य व्रत की भी अपनी विशेष तिथि होती है। पंडित विजयशंकर मिश्रा ने बताया कि वटसावित्री व्रत के बारे में निर्णयामृत व भविष्य पुराण आदि धर्मशास्त्रों ने 3 दिन तक व्रत (अर्थात ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी, चतुर्दशी व अमावस्या) करने का विधान बताया गया है। लेकिन लोकाचार के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित हमारे देश के अधिकतर भागों में ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को ही इस व्रत को करने की परम्परा है।

चतुर्दशी युक्त अमावस्या को रखें व्रत

पंडित विजयशंकर मिश्रा ने बताया कि इस व्रत में यदि अमावस्या दो दिन हो अर्थात प्रथम दिन यदि सूर्योदय के उपरांत 18 घटी से पूर्व अमावस्या लग जाए तो चतुर्दशी तिथि से विद्घ अर्थात चतुर्दशी युक्त अमावस्या में ही व्रत व संबंधित पूजन करना शास्त्रसम्मत है। ऐसा निर्णय सिंधु में वर्णित है। श्री काशी विश्वनाथ पंचांग, श्रीदेव पंचांग तथा धर्मसिन्धु आदि के अनुसार यह व्रत 29 मई रविवार को है तथा 30 मई सोमवार को सोमवती अमावस्या, स्नान दान दृ श्राध्द अमावस्या तथा शनिदेव की जयंती है।

पति की लंबी आयु की कामना को लेकर करते हैं पूजा-अर्चना

मैनपुर। इस वर्ष जेष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु की कामना से रखे जाने वाले वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाएं उत्साहित है क्योंकि पिछले दो साल कोरोना संक्रमण के चलते महिलाएं सार्वजनिक रूप से इस व्रत को नहीं कर पाये थे। इस संबंध में दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित योगेश शर्मा ने बताया कि अपने पति की लंबी आयु एवं सुखमय वैवाहिक जीवन सुख शांति समृद्घि की कामना से सुहागिन महिलाएं इस व्रत को करती हैं। वटवृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा के साथ भगवान विष्णु मां लक्ष्मी की पूजा एवं व्रत सावित्री व्रत कथा इस दिन सुनने का विधान है। श्री देव पंचांग के अनुसार जेष्ठ माह की अमावस्या तिथि 29 मई दिन रविवार को दोपहर 2.55 से शुरू हो रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का समापन 30 मई दिन सोमवार को शाम 4.59 बजे है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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