रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

खुशियों का त्योहार लोहड़ी पूरे उत्तर भारत में उत्साह से मनाया जाता है। यह त्योहार मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है। लोहड़ी पंजाबी समाज के लिए काफी महत्व रखता है। पहले यह किसी प्रदेश के लिए खास था, लेकिन अब देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके और मन्यताओं के साथ मनाया जाता है। पूर्व में लोग यह त्योहार अपने घरों, मोहल्लों और गांव में मनाते थे। अब बदले दौर में इसे सेलिब्रेट करने के लिए होटल और फॉर्म हाउस पहुंच रहे हैं। जहां समाज के लोग एक साथ मिलकर लोहड़ी सेलिब्रेट करते हैं। यह चलन ज्यादातर शहरों में है। क्योंकि शहरों में लोग एक साथ नहीं रहते हैं। इसलिए किसी खास जगह का चयन कर लोहड़ी मनाया जाता है। जहां सभी पंजाबी समाज के लोग एक साथ जमा होते हैं और लोहड़ी सेलिब्रेट करते हैं।

कैसे मनाते हैं लोहड़ी

लोहड़ी फसल की बोआई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। इस दिन अलाव जलाकर उसके इर्द-गिर्द डांस करते हैं। लड़के भांगड़ा करते हैं। लड़कियां और महिलाएं गिद्दा करती हैं। घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनते हुए रेवड़ी-मूंगफली और लावा खाते हैं। यह त्योहार घर में किसी खुशी के मौके पर भी मनाया जाता है। जैसे पुत्र के जन्म होने पर, विवाह होने पर। इसमें नवविहित पुत्रियों को मां के घर से 'त्योहार' (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी फलादि) भेजा जाता है। जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है या जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मोहल्ले में और पूरे गांव में रेवड़ी बांटते हैं।

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