जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पूर्व सरकार के कार्यकाल में बनाई गई महति कार्ययोजना के तहत आड़ावाल- मारेंगा बायपास सड़क शहर का गौरव की बजाय कलंक बनकर रह गया है। गुणवत्ताहीन निर्माण के चलते 19 किलोमीटर लंबा यह सड़क जगह-जगह गड्ढ़ों से अटा हुआ है। बरसात में हाल यह है कि यहां रोजाना 10 पहिया वाहनें फंस रही हैं। मोटरसायकल का चलना भी दुभर हो गया है। एनएच 30 व एनएच 16 को जोड़ने वाले इस मार्ग को बनाने का मकसद शहर व एनएच में यातायात का दबाव कम करना था लेकिन इसकी बदहाली के चलते लोड और अधिक बढ़ गया है। इस वजह लगातार हादसे हो रहे हैं।

बीते 30 दिनों में 14 लोगों की हादसे में मौत हुई है। वहीं 12 गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसे लेकर निरंतर जनोपयोगी लोक अदालत में शहर के युवा द्वारा शिकायत दाखिल करने की तैयारी भी की जा रही है। बता दें कि एनएमडीसी द्वारा प्रदत्त 36 करोड़ की लागत से 19 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण राजधानी स्थित एक ठेकेदार ने करवाया था। यह सड़क शुभारंभ के बाद ही बारिश में आधी बह गई थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के होहल्ला मचने व भारी जनविरोधों के चलते सरकार ने जांच अवश्य बैठाई थी लेकिन नतीजा सिफर निकला। ठेका फर्म पर पूर्व सत्तापक्ष का वरदहस्त होने के आरोप भी लगते रहे हैं।

विभागीय तकनीकी जांच में 19 में 17 किलोमीटर सड़क फेल होना पाया गया था। साथ ही जांच अधिकारी ने स्पष्ट रूप से ठेकेदार द्वारा नए सिरे से नई सड़क बनवाए जाने की अनुशंसा की थी। साथ ही मामले में लापरवाही के लिए तत्कालीन एसई, ईई, एसडीओ तथा सब इंजीनियर मानीटरिंग करने मे दोषी ठहराए गए थे। इन अफसरों पर कार्रवाई होनी तो दूर उन्हें पद से भी हटाना मुनासिब नहीं समझा गया था। सरकार बदलने के बाद कमिश्नर की अध्यक्षता में दोबारा जांच करवाने की जानकारी सरकार ने विधानसभा में विधायक के सवाल पर दी है।

जुलाई माह में बारिश शुरू होते ही इस मार्ग का कुछ हिस्सा फिर बह गया है। मारेंगा की ओर से करीब सात किलोमीटर तक जगह-जगह डामर की परतें उखड़ गई हैं। दो-दो फीट के गड्ढे हो गए हैं। भारी वाहनों के चक्के फंसने के चलते बायपास की बजाय शहर होते हुए भारी वाहनें गुजर रही हैं। अतिरिक्त चार पहिया व दोपहिया वाहन चालक भी उस मार्ग से गुजरने से गुरेज कर रहे हैं। परिणामस्वरूप शहर, एनएच 30 व एनएच 16 में लगातार ट्रेफिक प्रेशर बढ़ रहा है। इसकी परिणति खूनी सड़क हादसों के रूप में सामने आ रही है। बीते एक माह में 14 लोगों की हादसों में मौत हुई हैं। वहीं दर्जन भर गंभीर हुए हैं।

अदालत में लड़ेंगे जनहित की लड़ाई

शहर के कुम्हारपारा निवासी युवा सोहेल रजा ने इस मामले को लेकर निरंतर जनोपयोगी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। रजा ने बताया कि उन्होंने शहर व एनएच में हाल में हुए हादसों में अपने दो अभिन्न् मित्रों को खो दिया है। अप्रत्यक्ष रूप से जनता के धन से बनाई गई यह महात्वाकांक्षी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। इसका खामियाजा निर्दोष लोगों को चुकाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार सड़क हादसे रोकने के लिए लिहाज से भारीभरकम बजट बना रही है। एमव्ही एक्ट में संसोधन किया गया है। दूसरी तरफ बायपास धांधली मामले में दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है। वह अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में आवेदन दाखिल कर न्यायालय से मामले मे हस्तक्षेप करते हुए जिम्मेदारों से रिकवरी कर इस सड़क को दोबारा बनवाने की मांग करेंगे।